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Kumbh Mela 2021: हरिद्वार कुंभ में महाशिवरात्रि का स्नान नहीं करते बैरागी, अनोखी हैं इस महापर्व की ये परंपराएं...

Thu, 04 Feb 2021 04:24 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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kumbh mela 2021 - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
कुंभ महापर्व की कई मर्यादाएं हैं तो अनेक बंधन, मिथक और नियम भी उनके साथ जुड़े हैं। कुछ परंपराएं भी साथ चलती हैं। इनमें पहली है कि पहला शाही स्नान जुलूस गंगा पार के कुंभ मेला क्षेत्र से नहीं गुजरता, लेकिन अपर रोड होते हुए हरकी पैड़ी पहुंचता है। संन्यासियों की वापसी भी नगर के भीतरी मार्गों से होती है ।
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कुंभ - फोटो : फाइल फोटो
हरिद्वार कुंभ में साधु संतों के चार शाही स्नान होते हैं, जो इस बार भी होंगे। महाशिवरात्रि पर 11 मार्च को होने वाला पहला शाही स्नान संन्यासियों के सात अखाड़े पूर्ण गणवेश में शाही जुलूस निकालकर करेंगे। पहला शाही स्नान करने के लिए बैरागियों के तीन और उदासियों के दो अखाड़े नहीं आते। इसी प्रकार निर्मल अखाड़े के साधु भी पहला स्नान नहीं करते।
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हरकी पैड़ी - फोटो : अमर उजाला
हालांकि सांकेतिक रूप से पिछले हरिद्वार कुंभ में बाकी अखाड़ों के पांच-पांच महंत संन्यासियों के साथ गए थे। परंतु स्नान प्रोटोकॉल में यह शामिल नहीं है, इसलिए इस बार इसे नहीं दोहराया जाएगा। जिस प्रकार तीनों बैरागी अणियां पहला शाही स्नान नहीं करती, उसी प्रकार कोई भी अन्य अखाड़ा 27 अप्रैल को होने वाला अंतिम शाही स्नान करने हरकी पैड़ी नहीं जाता। आखिरी स्नान केवल तीनों बैरागी आणि अखाड़े ही करते हैं।

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हरिद्वार में वैश्य धर्मशाला - फोटो : अमर उजाला
कुंभ नगरी हरिद्वार में पूरा भारतवर्ष नजर आता है। यहां ऐसी भी बहुत सी इमारतें हैं, जिनके नाम उन शहरों के नाम पर हैं, जो पाकिस्तान, नेपाल या अफगानिस्तान में रह गए हैं। हरिद्वार में लाहौर हाउस , पेशावरियां धर्मशाला, गुजरांवाला भवन, बहावलपुर हाउस, कंधारी धर्मशाला, नेपाल हाउस, सिंध क्षेत्र, रावलपिंडी धर्मशाला जैसे भवनों के नाम ठहरने के स्थान मौजूद हैं। 
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हरिद्वार में बाबरी भवन - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह जब तीर्थयात्री यहां कच्छी आश्रम, गुजरात भवन, मारवाड़ी धर्मशाला, जोधपुर हाउस, भटिंडा धर्मशाला, मेरठ धर्मशाला, जम्मू भवन, पुंछ हाउस, बंगाली धर्मशाला, मद्रास भवन, मैसूर हाउस आदि देखते हैं तो कुम्भ नगरी में उन्हें मिनी भारत बसा नजर आता है। हरिद्वार में हरकी पैड़ी के बिल्कुल समीप बाबरी भवन मौजूद है। पहले इसे देखकर लोग चौंक जाया करते थे। लेकिन इसका निर्माण मुजफ्फरनगर के बाबरी गांव निवासी वैश्य समुदाय ने कराया था। 
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