जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए गढ़वाल के वीर सपूत मनदीप सिंह रावत की अंतिम यात्रा में बृहस्पतिवार को जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद का यहां मुक्तिधाम में पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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mandeep singh rawat
हजारों लोगों ने ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, मनदीप तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय’ आदि नारों के साथ शहीद मनदीप को नम आंखों से विदाई दी।
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बृहस्पतिवार सुबह छह बजे से ही लोग शहीद मनदीप के शिवपुर स्थित घर पर पहुंचने शुरू हो गए। करीब साढ़े सात बजे शहीद का पार्थिव शरीर घर पर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
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परिजन शहीद के ताबूत पर लिपटकर रोने बिलखने लगे। लोगों ने किसी तरह उनको ढाढ़स बंधाकर ताबूत से अलग किया।
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सेना के जवानों ने जैसे ही मनदीप के पिता बूथी सिंह, माता सूमा देवी और छोटे भाई सुदीप रावत को शहीद के अंतिम दर्शन कराए। बेटे का चेहरा देखकर माता-पिता विलाप करने लगे, भाई का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।
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शिवपुर से हजारों के जनसैलाब के साथ शहीद मनदीप की अंतिम यात्रा डिग्री कालेज रोड से बदरीनाथ मार्ग, झंडाचौक, मालगोदाम रोड, गाड़ीघाट होते हुए मुक्तिधाम पहुंची। इस दौरान सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में खड़े होकर लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।
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गाड़ी घाट स्थित मुक्तिधाम में 22 गढ़वाल राइफल्स के टूआईसी मेजर अजय सिंह के नेतृत्व में जवानों ने पूरी व्यवस्था संभाली।
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22 गढ़वाल के आठ जवानों की टुकड़ी ने बिगुल की धुन पर शोक शस्त्र, सलामी शस्त्र और हवा में तीन-तीन राउंड फायर कर शहीद को अंतिम सलामी दी।
इसके बाद शहीद मनदीप के पिता बूथी सिंह और छोटे भाई सुदीप सिंह ने शहीद को मुखाग्नि दी। हजारों की तादात में पहुंचे लोगों ने नम आंखों से कोटद्वार के शहीद बेटे को अंतिम विदाई दी।