गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) आने से प्रदेश मालामाल हो जाएगा। अभी तक की गणना के हिसाब से देखें तो जीएसटी से प्रदेश को पांच साल तक भी केंद्र सरकार से सहायता का मुंह नहीं ताकना होगा।
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वाणिज्य कर विभाग में अभी तक 75 हजार करदाता जीएसटी एनरोलमेंट करा चुके हैं। विभाग तेजी से जीएसटी लागू करने की ओर बढ़ रहा है।वाणिज्य कर अधिकारी एवं जीएसटी एक्सपर्ट यशपाल सिंह ने बताया कि जीएसटी के आने से उत्तराखंड को लाभ मिलेगा। इसके पीछे एक वजह 2020 तक एक्साइज छूट भी है।
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जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि अन्य प्रकार के करीब 18 करों से मुक्ति मिलेगी। जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। जैसे इस वक्त कुछ जरूरी चीजों को छोड़ दिया जाए तो वस्तु पर एक्साइज ड्यूटी 12.5 प्रतिशत है और वैट अपने राज्य के हिसाब से अलग।
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कुल मिलाकर 25 से 26 प्रतिशत कर देना पड़ता है। जीएसटी से सिर्फ एक कर लागू होगा। जिससे कीमतों में गिरावट आएगी और आम जनता को फायदा होगा।
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एक वस्तु पर जीएसटी पूरे देश में बराबर लगेगा। चाहे कोई व्यापारी ज्यादा माल उठाए या कम। हां एक और बात, जिस व्यापारी का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये से कम है तो उसे जीएसटी से राहत मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज छूट का आठ प्रतिशत हिस्सा (सीजीएसटी में जाने वाला) तो केंद्र सरकार माफ कर देगी और बाकी आठ प्रतिशत हिस्सा (एसजीएसटी में जाने वाला) राज्य के पास ही रहेगा।
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उन्होंने बताया कि 2015-16 के वित्तीय वर्ष के टारगेट को बेस बनाकर हर साल 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ करीब 8200 करोड़ रुपये का टारगेट आएगा। इसी साल, वाणिज्य कर विभाग ने 7150 करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन किया है। ऐसे में 8200 करोड़ रुपये कलेक्शन करना आसान है।
इसकी एक वजह यह भी है कि जीएसटी आने के बाद तमाम केंद्र के हिस्से भी राज्य के हिस्से में आने वाले हैं, जिससे रेवेन्यू बढ़ना लाजिमी है। वाणिज्य कर विभाग में अभी तक 75 हजार लोग जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ेगी क्योंकि विभाग का टारगेट एक लाख एनरोलमेंट का है।