यहां ग्लोबल वार्मिंग के कारण यहां जो हुआ उसे देखकर हर कोई हैरानी में पड़ा हुआ है।
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पैनखंडा क्षेत्र में लाल बुरांश के बीच सफेद बुरांश का खिलना कौतूहल का विषय बना हुआ है। आसपास के लोग सफेद बुरांश को देखने के लिए यहां आ रहे हैं। हालांकि वनस्पति विज्ञानी निचले क्षेत्रों में सफेद बुरांश खिलने के लिए जलवायु परिवर्तन को कारण बता रहे हैं।
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लाल बुरांश आमतौर पर समुद्र तल से दो हजार से 2200 मीटर की ऊंचाई के क्षेत्रों में खिलता है, जबकि सफेद बुरांश उच्च हिमालय क्षेत्र में 2300 से 2500 मीटर की ऊंचाई की जलवायु में पाया जाता है।
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मगर इन दिनों ब्लॉक के सेलंग गांव के जंगलों में लाल बुरांश के फूलों के बीच सफेद बुरांश अपनी छटा बिखेर रहा है। बता दें कि, बुरांस एक औषधीय पौधा भी है। जो कई गंभीर रोगों के इलाज में प्रयोग किया जाता है।
पीजी कॉलेज गोपेश्वर के वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता डा. विनय नौटियाल का कहना है कि सफेद बुरांश उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाली वानस्पतिक प्रजाति है। यदि यह निर्धारित क्षेत्र से अन्यत्र जलवायु में उग रहा है तो यह जलवायु परिवर्तन के कारण है।