फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gen Z का धर्मपथ: कंधों पर कांवड़, दिखा संयम और अनुशासन, आस्था के साथ थामे हैं संस्कारों की डोर, तस्वीरें

Tue, 11 Aug 2026 05:18 PM IST
Renu Saklani रेनू सकलानी

सार

कांवड़ के कठिन सफर में नई पीढ़ी भी पीछे नहीं है। बढ़ते कदमों में जोश है, कंधों पर कांवड़ और आस्था के साथ संस्कारों की डोर थामे नई पीढ़ी इस यात्रा का हिस्सा बन रही है। पैरों में घुंघरू, तन पर भगवा और जुबां पर ‘बम भोले’। कांवड़िए संयम और अनुशासन की मिसाल पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 5
हरिद्वार कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

कांवड़ यात्रा...आस्था, अनुशासन, त्याग और समर्पण।  कई किलोमीटर की पैदल यात्रा, भीषण गर्मी हो या बारिश। तप, व्रत और संयम की इस कठिन परीक्षा से हर कांवड़िया गुजर रहा है। लेकिन खास बात यह है कि इस परीक्षा में नई पीढ़ी जिसे आज कि नई भाषा में 'जेन जी' कहा जाता है, वो भी पीछे नहीं है। बदलते दौर में पीढ़ियां भले बदल रही हों, लेकिन कांवड़ यात्रा के जरिए परंपरा और संस्कार की यह डोर नई पीढ़ी तक भी पहुंच रही है।



हरिद्वार की कांवड़ यात्रा में महिला पुरुष और बुजुर्गो श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ आस्था की इस राह पर कदम बढ़ती नजर आई। सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय मानी जाने वाली जेन जी भगवा वस्त्र पहनकर, कई-कई किलोमीटर नंगे पांव चलकर, कंधों पर कांवड़, होंठों पर 'बोल बम' के जय घोष के साथ भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था जाहिर करती दिखीं। इनकी कहानियों में एक बात सामने आई की कांवड़ का भार उठाते-उठाते ये पीढ़ी कहीं न कहीं अनुशासन, संयम और संकल्प का अर्थ भी समझ रही हैं।

विज्ञापन

2 of 5
हरिद्वार कांवड़ यात्रा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता के कष्ट दूर हों, इसलिए 16 साल के भरत ने उठाई कांवड़
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बीच 16 साल का भरत भी भोलेनाथ की भक्ति में नजर आया। दिल्ली से आए भरत की यह चौथी कांवड़ यात्रा है। इससे पहले वह परिवार के साथ कांवड़ यात्रा पर आया है, लेकिन तब कांवड़ उसके पिता उठाते थे। इस बार पिता की तबीयत खराब है, तो उनकी जगह भरत ने कांवड़ उठाने का संकल्प लिया है। कांवड़ उठाने से पहले भरत हरिद्वार के मंदिरों में दर्शन कर रहा है। चेहरे पर थकान और पसीने की बूंदें साफ नजर आती हैं, लेकिन भक्ति का भाव कम नहीं हुआ। भरत का कहना है कि उसके पिता ने हमेशा परिवार के लिए कष्ट उठाए हैं। अब वह भोलेनाथ से बस यही प्रार्थना कर रहा है कि उसके पिता के सारे कष्ट दूर हों और वह जल्द स्वस्थ हो जाएं। परिवार की सुख-शांति के लिए भरत इस बार अपने कंधों पर कांवड़ लेकर निकला है।

विज्ञापन

3 of 5
प्रतीक, भरत, आकाश और आदित्य - फोटो : अमर उजाला
माता-पिता की खुशहाली के लिए 41 लीटर गंगाजल लेकर निकला आकाश

चेहरे पर गंभीरता, आंखों में शांति और गजब का अनुशासन। रायसी के आकाश के परिवार में आज तक किसी ने कांवड़ नहीं उठाई, लेकिन कम उम्र में ही उसने अपनी आस्था की यह राह खुद चुनी। अपने गांव से कांवड़ उठाने वाला आकाश पहला युवक है। डी-फार्मा की पढ़ाई कर रहा आकाश 41 लीटर गंगाजल लेकर निकला है,सिर्फ अपने माता-पिता की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना के लिए।

4 of 5
प्रतीक - फोटो : अमर उजाला
पैरों में घुंघरू, कंधे पर कांवड़, पढ़ाई में अच्छे होने की आस
गाजियाबाद के 11 साल के प्रतीक 8 लीटर गंगाजल लेकर अपने शिवालय की ओर निकले हैं। पैरों में घुंघरू, कंधे पर भगवा गमछा और जुबान पर ‘बोल बम’... इस छोटी सी उम्र में प्रतीक कांवड़ यात्रा के कठिन नियमों का भी पूरी तरह पालन कर रहे हैं। भोलेनाथ से उनकी बस इतनी सी प्रार्थना है कि वे पढ़ाई में अच्छे हो जाएं। मासूम उम्र में भक्ति का भाव कितना समझ आया, यह कहना मुश्किल है, लेकिन यात्रा के अनुशासन को प्रतीक ने जरूर अपना लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गंगा जल भर अपने शिवालयों की ओर रवाना - फोटो : अमर उजाला
101 लीटर जल, 18 साल की उम्र और भोलेनाथ पर अटूट भरोसा
लक्सर के 18 साल के आदित्य 101 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। आदित्य कहते हैं कि वह इस यात्रा के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते, लेकिन इतना जरूर समझते हैं कि कठिन तपस्या के बाद सुखद परिणाम मिलते हैं। माता-पिता के अच्छे स्वास्थ्य की कामना लेकर वह भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि निस्वार्थ भाव से उठाई गई उनकी यह कांवड़ और मन की प्रार्थना भोलेनाथ जरूर सुनेंगे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें