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देहरादून पहुंचने वाले हैं देशभर के समलैंगिक, लड़ेंगे अपने हक की लड़ाई

Sun, 16 Jul 2017 08:26 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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अपने हक की लड़ाई के लिए राजधानी देहरादून में लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल एंड ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) प्राइड वॉक का आयोजन करने जा रहे हैं। 
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यह आयोजन प्रयोजन कल्याण समिति की ओर से 30 जुलाई को होने जा रहा है। प्राइड वॉक की संयोजक माही के मुताबिक, उन्होंने प्रशासन से इसकी अनुमति ले ली है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्राइड वॉक का आयोजन होगा। दिल्ली, चंडीगढ़, चेन्नई के बाद दून में पहली बार यह परेड होगी।
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प्राइड वॉक की संयोजक माही ने बताया कि 30 जुलाई को वॉक घंटाघर से आयोजित की जाएगी। इसका पूरा रूट जल्द निर्धारित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें न केवल उत्तराखंड, बल्कि यूपी, दिल्ली, चंडीगढ़, चेन्नई समेत देशभर से गे, लेस्बियन एवं ट्रांसजेंडर शामिल होंगे। 

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चूंकि, पहली बार प्राइड वॉक देहरादून में होगी और तमाम संगठन इस तरह के कार्यक्रमों का हिंसक विरोध करते हैं, लिहाजा पुलिस-प्रशासन से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था मांगी गई है। माही ने बताया कि प्रशासन ने अनुमति दे दी है। इस बाबत पूछने पर शहर कोतवाल डीबीडी जुयाल ने कहा कि ऐसे किसी कार्यक्रम को अनुमति देने की जानकारी उनको नहीं है। 
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इनके लिए बुलंद करेंगे आवाज 
1. समाज में गे, लेस्बियन एवं ट्रांसजेंडर को कानूनी हक और बराबरी का सम्मान मिले।
2-राशन कार्ड सहित अन्य सुविधाएं देने की मांग।
3. आवास विकास योजना के तहत मिले आवास। 
4. बेरोजगारी दूर करने के लिए रोजगार को उठाएं जाएं मजबूत कदम।
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कानूनन जुर्म है समलैंगिक संबंध
दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 के फैसलों में दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को जायज ठहराया था। वर्ष 2013 में कई धार्मिक संस्थाओं ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 (दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली धारा) को सही ठहराया था। गे राइट्स एसोसिएशन ने वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट चाहे तो अपने फैसले पर सैद्धांतिक तौर पर पुनर्विचार कर सकता है। फिलहाल दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को भी कानूनन जुर्म माना जाता है।
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केरल करता है सबसे ज्यादा समर्थन
1. वर्ष 2015 में केरल देश का पहला राज्य बना, जिसने ट्रांसजेंडर पॉलिसी लागू की। इसका मकसद सेक्सुअल माइनारिटी ग्रुप को सामाजिक और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना था। 
2. वर्ष 2016 के बाद केरल में रि-एसाइनमेंट सेक्स सर्जरी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। यह सरकारी अस्पतालों में बेहद कम खर्च में होती है। इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को बढ़ावा मिला है।
3. सरकार ने किस ऑफ लव जैसे मूवमेंट को बढ़ावा दिया। इसके तहत एलजीबीटी समुदाय के लोगों ने सड़क पर आकर रेनबो कलर बनाकर अपने इरादे जाहिर किए।
4. हाल ही में कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने केरल सरकार से आग्रह किया है कि वह सांसदों को साथ लेकर संसद में समलैंगिकों को आजादी दिलाने के लिए संसद में प्राइवेट बिल लाएं।
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