भाई साहब रात के लगभग 11.30 बजे रहे थे, दुकान बंद कर सोने की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान हल्की बारिश हो रही थी, तभी तेज आवाज के साथ भरभराकर पहाड़ी का ढेर आंखों के सामने था... फिर मलबे के सिवा कुछ नजर नहीं आया।
ये शब्द भूस्खलन से बही दुकानों के समीप ही दुकान संचालन करने वाले राजेश रावत व संदीप रावत के हैं। कहना है कि पलभर में मौत का मंजर आंखों के सामने था, किसी को बचान तो दूर, पलक झपकने का समय नहीं मिला।
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के डडोली गांव निवासी राजेश रावत, संदीप रावत ने भी डाटपुल के समीप दुकान खोली थी। 25 अप्रैल से अभी तक वह हां अपनी दुकानों में थे। घटना को याद करते हुए वह बताते हैं कि रात के 11 बजे तक अमर बोहरा, नीर बहादुर व अन्य दुकान में ग्राहक थे।
उन्होंने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिए चले गए। इस दौरान हल्की बारिश हो रही थी। अब, सभी दुकानदार भी खाना खाकर अपनी-अपनी दुकानें बंद करने की तैयारी कर रहे थे। जबकि कुछ दुकानदार, होटल-ढाबा वाले, सुबह के नाश्ते के लिए आलू-चना उबालने में जुटे थे।