श्रद्धालुओं की यह भीड़ गंगा दशहरे के बाद ज्येष्ठ पूर्णिमा तक रहेगी। सोमवती अमावस्या पर रोहिणी व्रत, शनैश्चर जयंती, वट सावित्री व्रत, बड़मावस और भावुका अमावस्या के संयुक्त पर्व हैं। अमावस्या यूं तो प्रत्येक महीने आती है। पर इस बार की अमावस्या इन संयोगों के साथ-साथ कुछ नए संयोग योग भी लाएगी।