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पिता ने देश को दिलाई आजादी, बेटा रिक्शा चलाकर गुजर-बसर करने को मजबूर, तस्वीरें झकझोर देंगी...

Thu, 20 Dec 2018 12:55 PM IST
अलका त्यागी दिनेश कौशिक/अमर उजाला, जसपुर
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सतपाल
जिस पिता ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी उस स्वतंत्रता सेनानी का बेटा आज कुटुंब पेंशन और अपने हक की लड़ाई लड़ते थक गया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरीशचंद के बेटे सतपाल (65) रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करने को मजबूर हैं। 
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सतपाल
उनकी कुटुंब पेंशन योजना की फाइल तीन जनवरी 2018 से तहसीलदार के कार्यालय में धूल फांक रही है और तहसीलदार कहते हैं कि ‘फाइल तलाश करके कार्यवाही कराएंगे।’ग्राम कलियावाला निवासी रिक्शा चालक सतपाल (65) के पिता हरीशचंद ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी। 
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सतपाल
इस लड़ाई के दौरान उन्हें दो वर्ष की सजा हुई थी। आजादी के बाद हरीशचंद ग्राम कलियावाला में आकर बस गए। यहां पुराने डाकखाने के पास चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का गुजर-बसर करते रहे। उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पेंशन मिल रही थी।

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सतपाल
सात मार्च 1993 को उनका निधन हो गया, तब उनकी पत्नी मायादेवी को पेंशन मिलने लगी। दो सितंबर 1997 को मायादेवी का भी निधन हो गया और पेंशन बंद हो गई। इधर, पिता के निधन के बाद से ही यानी 1993 से सतपाल परिवार के भरण पोषण के लिए रिक्शा चलाने लगे। 
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सतपाल
परिवार में पत्नी पुष्पा देवी के अलावा चार बेटियां भारती, सोमा, आरती और पूजा हैं। इनमें से आरती और पूजा की शादी हो चुकी है। सोमा माता-पिता के साथ रहती है, जबकि भारती काशीपुर में एक डॉक्टर के घर सफाई का काम करती है और वहीं सर्वेंट हाउस में रहती है।
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