विरासत की चौथी शाम लोक कलाओं के नाम रही। कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। दर्शक देर रात तक कलाकारों के साथ झूमते रहे। पंजाबी ग्रुप के साथ दर्शकों ने भी गिद्दा और भंगड़ा किया।
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सोमवार को चौथे दिन अंबेडकर स्टेडियम में विरासत साधना में स्कूलों व संस्थानों के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। ब्राइटलैंड स्कूल के 11 वर्षीय अंकुर और 15 वर्षीय श्रृष्टि ने शानदार प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा दिखाई। सीजेएम स्कूल की हर्षिता ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी।
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कृपालि, अर्जिता ध्यानी और विष्णु सेनी ने भी शानदार प्रस्तुतियां दी। शाम को पंजाब के कलाकारों के मालवा इंटरनेशल ग्रुप ने जगमोहन जोत की अगुवाई में प्रस्तुति दी।
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उन्होंने ‘भंगड़ा शान है मच्च फुट्ट छोबरा दी’ और ‘जंद माही’ पर लोक नृत्य किया। इस नृत्य में प्रेमी युगल की प्यार भरी नोंक-झोंक को दर्शाया जाता है। पुरुष कलाकारों ने पगड़ी और महिलाओं ने घाघरा-चोली के साथ ही रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर प्रस्तुतियां दी।
इसके बाद हिमाचल के सरस्वती स्वर संगम ने पूनम वर्मा के नेतृत्व में झमकड़ा नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘आओ नी साइयां, मंगल गाओ’ पर खूब तालियां बटोरी। जम्मू के रुपाली और ममनदीप ने अपनी टीम के साथ शानदार डोगरी नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद मालवा, मध्य प्रदेश के लोक गायक कालूराम बमनिया ने कबीर, मीरा और बाबा गोरखनाथ के निर्गुण भजनों की प्रस्तुति दी।