अगर आपकी शादी का दिन तय नहीं हो पा रहा है, या कोई और समस्या, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में लोगों का विश्वास है कि सभी के समाधान में निर्णय देने में सक्षम हैं कंडार देवता। कंडार देवता के मंदिर में दो दिनी मेला भी शुरू हो गया है।
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कंडार देवता उत्तरकाशी जनपद के बाडाहाट, बसुंगा, बग्याल गांव, पाटा, संग्राली, लक्षेश्वर, क्षेत्रपाल व खांड गांव के सर्वमान्य देवता है। यहां के लोग विवाह की तिथि या अन्य मुहूर्त निकालने के लिए कभी पंचाग का सहारा नहीं लेते। कंडार देवता ही सब तय करता है।
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मेला संग्राली गांव में शुरू हो गया। गांव के लोग अपने घरों में बाहर से आने वाले सभी आगंतुको के भोजन व चाय आदि की व्यवस्था करते है। मंदिर में पूजा अर्चना के बाद देवता की डोली को प्रांगण में निकालकर श्रद्धालुओं के कंधों पर रासौं नृत्य के लिए आसीन किया जाता है।
इस बार दो दिनों तक चलने वाले इस मेले के अंतिम दिन सरकारी व गैर सरकारी स्टाल लगाए जाएंगे। रविवार को मेले के पहले दिन संग्राली के युवा मंगल दल के सदस्यों ने गांव में स्वच्छता अभियान चला कर ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।