मार्च महीने से उत्तराखंड में बिजली की दर 12.28 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है। ऊर्जा कंपनियों द्वारा टैरिफ में वृद्धि करने में याचिका विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दाखिल कर दी गई है।
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बिजली
- फोटो : amar ujala
आयोग द्वारा इस पर चार माह के अंदर फैसला लिया जाएगा। फैसला लिए जाने से पहले विभिन्न स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे और प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर जन सुनवाई आयोजित होगी। प्राप्त सुझाव और मेरिट के आधार पर आयोग द्वारा मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में वित्त वर्ष 2017-18 के टैरिफ दर जारी किए जाएंगे।
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बिजली
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गौरतलब है कि यूपीसीएल, पिटकुल और उत्तराखंड जल विद्युत आयोग (यूजेवीएनएल) द्वारा टैरिफ निर्धारण हेतु याचिका विद्युत नियामक आयोग में दायर की गई है।
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ऊर्जा कंपनियों ने याचिका वित्त वर्ष 2017-18 की वार्षिक आवश्यकता एवं वित्त वर्ष 2015-16 के स्वीकृत राशि के आधार पर आयोग के समक्ष याचिका दायर की गई है।
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बिजली संकट
आयोग ने इन याचिकाओं में कुछ कमियां इंगित करते हुए इसे स्पष्ट करने का आदेश दिया था। कंपनियों द्वारा कमियों में सुधार कर लिया गया है। यूपीसीएल द्वारा चालू वित्त वर्ष के 5252.87 करोड़ रुपये के मुकाबले 6077.78 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) दर्शाई गई है।
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह से पिटकुल द्वारा 261.04 करोड़ के मुकाबले 434.91 करोड़ रुपये और यूजेवीएनएल द्वारा 555.87 करोड़ के मुकाबले 779.89 करोड़ रुपये की आवश्यकता एआरआर के रूप में दर्शाई गई है।
आयोग के सचिव नीरज सती के मुताबिक कंपनियों के दावे के अनुरूप एआरआर को अनुमोदित किए जाने की दशा में वित्त वर्ष 2017-18 में उपभोक्ताओं की टैरिफ में लगभग 12.28 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि अभी विभिन्न स्तरों पर सुझाव आमंत्रित कर कंपनियों के दावों पर फैसला किया जाएगा। आयोग द्वारा इस संबंध में मार्च माह के अंतिम सप्ताह में फैसला लिए जाने की संभावना है।