बौने पौधों का संसार
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वसंत विहार निवासी मेजर अशोक सेना में चोटिल होने के बाद दिव्यांगता का शिकार हो गए थे। लिहाजा, उन्होंने सेना से वीआरएस ले लिया। उसके बाद उन्होंने ओएनजीसी ज्वाइन किया। एक बार जब वह अमेरिका गए तो उन्होंने वहां बोन्जाई पौधे देखे थे। वहीं से उन्हें इनका शौक पैदा हुआ। घर आए तो पौधों को बोन्जाई बनाने का अभ्यास शुरू किया। आसान न था, लेकिन खुद किताबें पढ़ी। बोन्जाई की दुनिया को समझा और शुरू हो गए। अब 35 साल बीत गए। आज उनकी बगिया को 60 से ज्यादा प्रजातियों के पौधे महका रहे हैं।