फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरों से खेलने के बाद एक युवक को मिला ऐसा 'स्वर्ग' कि भूल बैठा सबकुछ, तस्वीरों में देखें...

Mon, 06 Nov 2017 08:57 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
1 of 8
leh
कुछ खतरों से खेलने का जज्बा, कुछ नया देखने और महसूस करने की ललक, रहस्य-रोमांच की अनुभूति का आनंद और दुर्गम घाटियों की अलौकिक सुंदरता निहारने का सुख। ये प्रेरणा कम नहीं बाइक पर लंबे और दुर्गम रास्ते नापकर एक अजूबी सी दुनिया के सफर के अनोखे अनुभव के लिए। जम्मू-कश्मीर के लद्दाख जिले की रूपशू घाटी की इसी तरह की यात्रा के 19 दिनों के अनुभव को आपके साथ बांट रहे हैं हल्द्वानी के मनीष चौधरी- 
 
विज्ञापन

2 of 8
leh
सोलो बाइक राइड विगत 20 सितंबर को हल्द्वानी से सुबह 4 बजे शुरू हुई थी। मनाली होते हुए रोहतांग दर्रा पार करके जिस्पा पहुंचा। उसके बाद सो मुरारी, शिंखुला और वारी ला दर्रे को पार करते हुए रूपशू वैली तक पहुंचने का रिकार्ड बनाया। विगत 9 अक्तूबर तक यह पूरा सफर 4870 किमी का रहा। बेहद खराब रास्ते, डरावना निर्जन क्षेत्र और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद जब लद्दाख की रूपशू घाटी पहुंचा तो रोमांचित हो उठा। उस घाटी की दुनिया एकदम बदली-सी दिखी।

 
विज्ञापन

3 of 8
leh
 शिंखुला दर्रे से होकर बहुत कम लोग बाइक से गुजरे हैं। यह दर्रा करीब 16615 फुट पर है। खास बात यह है कि इसके ऊपरी हिस्से पर आप सालभर बर्फ देख सकते हैं। इस दर्रे तक पहुंचने के लिए सड़क अभी बन ही रही है, जिसकी वजह से बाइक चलाना काफी मुश्किल हो रहा था। जैसे-तैसे मैंने बाइक शिंकुला दर्रे के शीर्ष पर पहुंचा दी। ये दर्रा जिस्पा से 62 किमी की दूरी पर है जिसमें 35 किमी सड़क की हालत बहुत खराब है।

 

4 of 8
leh
जम्मू-कश्मीर के खारू के पास निर्जन और शांत वादियों में सूर्यास्त का नजारा देखने लायक था। पेड़-पौधेविहीन पहाड़ की ओट में सूर्य का छिप जाना रोमांचित करने वाला था। यह पूरा दृश्य किसी चित्रकार की चित्रकारी जैसा लगा। वारी ला दर्रे को भी मैंने पार किया। बाइक से 17427 फुट ऊंचाई पर स्थित दर्रे को पार करने में काफी लोग डरते हैं। वारी ला में हिमस्खलन, भारी बर्फबारी और भूस्खलन कभी भी हो जाता है।

 
विज्ञापन

5 of 8
leh
मौसम कब बदल जाए कोई नहीं जानता और इतनी ऊंचाई होने की वजह से ऑक्सीजन भी कम ही मिल पाती है। सड़क बहुत खराब है और अगर आपने ब्रेक गलत तरीके से लगा दिए तो ढाल होने की वजह से बाइक के फिसलने का खतरा होता है।

 
विज्ञापन

6 of 8
leh
चौथी बार लेह भी गया, जो बाइकरों के लिए मक्का-मदीना माना जाता है। करीब 15 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित सो मोरारी झील लेह से लगभग 220 किमी की दूरी पर है। सो मोरारी का सफर मैंने पूरा किया। यहीं पर कारजोक गांव में रुककर लोगों से रूबरू होने का मौका मिला। सुबह आंख खुली तो सूर्योदय का अलौकिक दृश्य सामने था। नीली झील के विस्तार के पार थोड़े से उभार वाले पहाड़ के पीछे से उगता सूरज और झील पर पड़ती उसकी किरणों का सौंदर्य, अपलक देखता ही रह गया।
 
विज्ञापन

7 of 8
leh
चुनौतीपूर्ण सफर कर लद्दाख की रूपशू घाटी में पहुंचा तो यहां दुनिया एकदम बदली सी दिखी। दिन का तापमान करीब आठ डिग्री था। बर्फीली हवाएं चल रही थी। रूपशू में कई घाटियां बंजर जैसी हैं, फिर भी देखने में आकर्षक हैं।

 
विज्ञापन

8 of 8
leh
यहां पहुंचने के बाद राह की सारी थकान दूर हो गई। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग भेड़-बकरियों और पश्मीना ऊन से आजीविका चलाते हैं। रूपशू घाटी में 20150 फुट पर बाइक से पहुंचने वाला उत्तराखंड का मैं पहला बाइकर हूं। हालांकि रूपशु घाटी में ही 21524 फुट की ऊंचाई पर बाइकिंग का रिकार्ड कोलकाता के बाइकरों के नाम है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें