बच्चों को देखकर हर किसी के दिल में ममता जाग उठती है, फिर चाहे वह इंसान का हो या जानवर का, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अल्मोड़ा जिले के सुदूरवर्ती चौंरा गांव में इसका उदाहरण देखने को मिल रहा है। गांव का एक कुत्ता (कालू) पिछले डेढ़ माह से बंदरिया के बच्चे (रामू) की देखभाल कर रहा है।
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तस्वीरों में देखें, कुत्ते और बंदर की अनोखी दोस्ती
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भिकियासैंण विकासखंड के चौंरा निवासी मोहन सिंह पप्पी का कुत्ता कालू बंदरों का जानी दुश्मन है। डेढ़ माह पहले का है, बताते हैं कि एक बंदरिया अपने दुधमुंहे बच्चे को साथ लेकर कालू से आंख बचाकर रोज गांव में उत्पात मचाती थी। एक दिन कालू की नजर बंदरिया पर पड़ गई। कालू ने बंदरिया को घेर लिया और दोनों के बीच काफी देर तक संघर्ष हुआ, जिसमें बंदरिया की मौत हो गई।
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बंदरिया की मौत होने पर उसका दुधमुंहा बच्चा अकेला हो गया। मां की मौत के बाद रामू कालू को देखता रहा। कालू की ममता जागी, उसने रामू को पीठ पर उठाया और घर ले आया। मोहन सिंह रामू को कटोरे में दूध भी पिलाते हैं। शाम होने पर कालू रामू को पीठ पर बैठाकर पूरे गांव का चक्कर लगता है।