फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh Disaster : मलबे में दबे शवों को ढूंढेगा डाग स्क्वायड, आपदा प्रभावितों से मिलेंगे मंत्री अरविंद पांडेय

Thu, 23 Jul 2020 10:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
1 of 7
- फोटो : अमर उजाला
टांगा गांव में मलबे में दबे शवों को ढूंढने के लिए डाग स्क्वायड की मदद ली जाएगी। देहरादून से एक डाग स्क्वायड दल पिथौरागढ़ से बंगापानी के लिए सुबह 6.30 बजे रवाना हो गया है। लापता 11 लोगों में से 07 के शव मिल चुके हैं। चार की तलाश जारी है। जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय आज दिन में एक बजे टांगा गांव पहुंचकर आपदा प्रभावितों से मिलेंगे और राहत कार्यों का जायजा भी लेंगे।
विज्ञापन

2 of 7
- फोटो : अमर उजाला
आसमानी आफत से श्मशान बने टांगा गांव में संचार की सुविधा नहीं है। ऐसे में 19 जुलाई की रात हादसे की सूचना देने के लिए ग्रामीणों को ढाई बजे रात गांव के ठीक ऊपर स्थित आठ सौ मीटर की ऊंची पहाड़ी पर चढ़ना पड़ा था, तब जाकर उन्होंने विधायक को हादसे की जानकारी दी। मुनस्यारी विकासखंड के दुर्गम और दुरुह ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी संचार सुविधा नहीं है।
 
विज्ञापन

3 of 7
- फोटो : अमर उजाला
यहां के लोगों को आज भी परिजनों की कुशल क्षेम पूछने के लिए या तो तहसील मुख्यालयों की दौड़ लगाते हैं या फिर ऊंची पहाड़ियों में चढ़कर फोन का सिग्नल खोजने की कोशिश करते हैं। आपदा काल में संचार की सुविधा नहीं होना सबसे ज्यादा अखरता है। टांगा गांव में भी ऐसा ही हुआ। रविवार रात जब टांगा गांव में बारिश के साथ आसमानी आफत बरसी तो घरों के साथ रास्ते भी बह गए।
 

4 of 7
- फोटो : अमर उजाला
रात लगभग साढ़े 11 बजे बारिश ने तीन मकानों के साथ 11 जिंदगियों को लील लिया था। इस घटना के बाद सभी लोग ग्राम प्रधान सुनीता देवी के मकान के आंगन में एकत्र हो गए। लोगों के पास मोबाइल फोन तो थे लेकिन सिग्नल नहीं आने से समस्या यह थी कि हादसे की सूचना पुलिस या प्रशासन को देकर मदद कैसे मांगी जाए। गांव के ऊपर दरकती पहाड़ियां और नीचे जमीन को लीलती मोतीगाड़ नदी के शोर से ग्रामीण बेबस थे।
 
विज्ञापन

5 of 7
- फोटो : अमर उजाला
सेराघाट में सिग्नल आते थे लेकिन वहां पहुंचना नामुमकिन था। आखिरकार गांव के लोगों ने आपस में सलाह लेकर टिकेंद्र सिंह और एक अन्य को ऊंची पहाड़ी पर जाकर इसकी सूचना प्रशासन को देने को कहा ताकि कोई मदद मिल सके। दो लोग टार्च और मोबाइल लेकर ऊंची चोटी में चढ़ते रहे। आसमानी आफत थमी नहीं थी बारिश के साथ पहाड़ी नालों के कारण जगह-जगह जमीन दरक रही थी।
 
विज्ञापन

6 of 7
- फोटो : अमर उजाला
रात ढाई बजे, करीब आठ सौ मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद फोन में सिग्नल आए तो सबसे पहले टिकेंद्र सिंह ने धारचूला के विधायक हरीश धामी को फोन किया। गांव के बुजुर्ग चंद्र राम, गोपाल सिंह, गोविंद सिंह, महिमन सिंह, जमुना देवी ने अमर उजाला को बताया कि जब पहाड़ी में चढ़े युवकों ने लौटकर उन्हें बताया कि विधायक तक सूचना पहुंच गई है तब उन्हें मदद मिलने की उम्मीद जगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पौ फटने तक सभी लोगों ने आंखों में ही पूरी रात काटी। ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव में संचार की सुविधा होती तो समय पर मदद मिलने से मकान में दबे लोगों की जान भी बचाई जा सकती थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें