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जब भगवान शिव के इस धाम में लोगों को डराने लगी थी आत्माएं, 17 साल बाद फिर वही मंजर देख कांप गए लोग!

Sat, 19 Aug 2017 05:42 PM IST
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, पिथौगराढ़
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वर्ष 1998 के हादसे के बाद फिर से आबाद हुए मालपा पड़ाव की उम्र महज 17 साल रही। मालपा हादसे के दो साल बाद मालपा पड़ाव के आबाद होने की भी रोचक कहानी है। मालपा हादसे के बाद स्थानीय लोग भयाक्रांत हो गए।
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क्षेत्र में यह बात फैल गई कि मालपा हादसे के मृतकों की आत्मा लोगों को डराती है। इसे देखते हुए मालपा पड़ाव को फिर से बसाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया। वर्ष 1997 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए यात्रियों ने वर्ष 2000 में मालपा में मृतकों की स्मृति में स्मारक बनाया।
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स्मारक बनाने में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आर्थिक सहयोग दिया। इसके बाद मालपा एक बार फिर आबाद हो गया। 14 अगस्त की तड़के मालपा एक बार फिर तबाह हो गया। अब लोगों को लगता है क‌ि शायद ये उन्हीं शक्त‌ियों का प्रकोप है जो इस गांव में आपदा आई है। 

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17 अगस्त 1998 को मालपा में बादल फटने से हुए भूस्खलन में 60 कैलाश यात्रियों समेत 200 लोग जिंदा दफन हो गए थे। तब मालपा में 9 परिवार रहते थे। 14 रहने और खाने के होटल थे। हादसे के बाद मालपा के फिर से आबाद होने की उम्मीद नहीं के बराबर थी।
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इस नाउम्मीदी के पीछे इलाके में फैली भूत-प्रेत की बातें थीं। कहा जाने लगा था कि मालपा हादसे में मारे गए लोगों की आत्मा डराती है। इस कारण कोई भी मालपा में फिर से दुकान खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
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वर्ष 1997 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा में गए यात्रियों ने 4 सितंबर 2000 को मालपा में वर्ष 1998 के हादसे में मारे गए कैलाश यात्रियों की स्मृति में स्मारक बनाया। भगवान शंकर की मूर्ति स्थापित की। स्मारक बनाने में मध्यप्रदेश के तत्कालानीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सहयोग की बात भी स्मारक में लिखी गई थी।
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स्मारक बनने के बाद स्थानीय लोगों में मालपा के प्रति कुछ भय कम हुआ। वर्ष 2000 में जिप्ती निवासी धन सिंह थापा ने मालपा में खाने और रहने का होटल खोला। 2005 में जिप्ती के ही जयमल सिंह ने होटल खोला, वर्ष 2008 में सिमखोला के कुंदन सिंह ने होटल खोला।
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​वर्ष 2013 में बूंदी निवासी पुष्कर सिंह ने रहने, खाने का होटल खोला। इन होटलों में अन्य जरूरत का सामान भी मिल जाता था। 14 अगस्त के हादसे में धन सिंह थापा, उनकी पत्नी जिप्ती बसंती देवी, दुकानदार जयमल सिंह, व्यापारी पुष्कर सिंह की पत्नी लालती देवी की मौत हो गई। घटना के दिन पुष्कर सिंह सामान लेने धारचूला गए थे, जिस कारण उनकी जान बच गई।
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