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कभी बच्ची तो कभी बुढ़िया बन जाती है ये देवी मां, जानिए इसका रहस्य

Thu, 21 Sep 2017 08:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
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dhari devi
21 सितंबर को शारदीय नवरात्र पर्व शुरू हो रहे हैं। इस मौके पर जानिए, देवी मां का ऐसा मंदिर, जहां स्वयं देवी की मूर्ति 24 घंटे में तीन रुप बदलती है, जानिए, इसका रहस्य...
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dhari devi temple
सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित है। पहले यह मंदिर अलकनंदा नदी किनारे चट्टान में स्थित था। लेकिन श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील की वजह से अलकनंदा का जल स्तर ऊपर हो गया। इसके चलते परियोजना संचालन कर रही कंपनी ने मूल स्थान के ठीक ऊपर पिलरों के सहारे मंदिर को उठा दिया। अब मंदिर पिलरों के सहारे नदी के बीच में हैं। वर्तमान में स्थायी मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है।
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dhari devi temple
धारी देवी को काली माता का रुप माना जाता है। कहा जाता है कि बाढ़ में धारी देवी कालीमठ से बहकर आई थी। धारी गांव के समीप रात में लोगों ने किसी स्त्री की आवाज सुनी। जब लोग नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने पानी में तैरते हुए एक मूर्ति देखी। धारी के कुंजू धुनार सहित ग्रामीणों ने देवी की मूर्ति को पानी से बाहर निकाला। इसी दौरान पुन: स्त्री की आवाज आई कि मूर्ति को यहीं स्थापित कर दिया जाए। इसके बाद मूर्ति को स्थापित कर दिया गया। 

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dhari devi temple
ऐसा विश्वास है कि धारी देवी दिन में तीन रुप बदलती है। देवी सुबह कन्या, दिन में युवती और रात में वृद्धा का रुप धारण करती है। यहां लोग दूर दराज से मनौतियां मांगने आते हैं। शादी के बाद नवविवाहित जोड़े मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। मंदिर मे सुबह शाम देवी की आरती होती है। नवरात्रों के मौके पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 
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dhari devi temple
ऐसे पहुंचे यहां: धारी देवी मंदिर ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित है। यह मंदिर श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर  और रुद्रप्रयाग से  19 किमी दूर है। मंदिर जाने के लिए कलियासौड़ से लगभग 500 मीटर पैदल रास्ता है। 
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