नोट बंदी के बाद नुकसान झेल रहे व्यापारियों ने अब इसका तोड़ निकाल लिया है। जिसके बाद अब इन व्यापारियों ने चैन की सांस ली है।
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- फोटो : SOCIAL MEDIA
देहरादून में कारोबारियों ने अपने लगातार गिर रहे कारोबार को उठाने के लिए अब स्वैप मशीनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसके बावजूद बेहद कम ऐसे ग्राहक आ रहे हैं जो कि अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते हैं। व्यापारियों का कहना है कि उनका कारोबार शादियों के इस सीजन में महज 30 प्रतिशत ही रह गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
शहर के पलटन बाजार सहित तमाम प्रमुख बाजारों में इन दिनों शादियों के सीजन में भी भारी सन्नाटा है। कई बड़े साड़ी, सूट और गाउन के विक्रेता तो दिनभर ग्राहकों की राह ताकते रहते हैं। बर्तन, कपड़ों से लेकर कॉस्मेटिक तक के कारोबारियों का हाल बुरा है।
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कारोबारियों का कहना है कि उनका कारोबार 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। शादियों के सीजन की सभी उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। अब ग्राहकों की सुविधा के लिए ई-पेमेंट और कार्ड स्वैप की मशीनों का इंतजाम तेजी से कर रहे हैं। बावजूद इसके बेहद कम ग्राहक ऐसे आ रहे हैं, जो कि कार्ड से या ईपेमेंट करते हैं।
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- फोटो : SOCIAL MEDIA
स्वैप मशीन लेने के लिए सबसे पहले व्यापारी को बैंक में करेंट अकाउंट खोलना होगा। एसबीआई के अधिकारी एमएल जोशी ने बताया कि अगर व्यापारी बीएसएनएल की लीज लाइन का इस्तेमाल करेंगे तो उनसे कोई किराया नहीं लिया जाता। अगर जीपीआरएस डेस्कटॉप डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं तो 250 रुपये प्रतिमाह और अगर जीपीआरएस पोर्टेबल स्वैप मशीन का इस्तेमाल करते हैं तो 450 रुपये प्रतिमाह किराया देय होगा।
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अगर ग्राहक दो हजार रुपये तक की ट्रांजेक्शन कार्ड स्वैप करके करता है तो इस पर व्यापारी को 0.75 प्रतिशत और अगर इससे ऊपर की ट्रांजेक्शन कार्ड से करता है तो उस पर एक प्रतिशत की दर से टैक्स देय होता है। अलग-अलग बैंकों में इसमें कुछ बदलाव भी हो सकते हैं।
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gurmeet
कारोबार में गिरावट तो आई है लेकिन अब ग्राहकों की सुविधा के लिए हम कार्ड से पेमेंट भी कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द हालात सुधरेंगे।
- गुरमीत सिंह, गाउन कारोबारी
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mayank
कई ग्राहक तो खुले पैसे लेकर आ रहे हैं लेकिन काफी ग्राहक ऐसे भी हैं जो कि पुराने नोटों को चलाने की मांग करते हैं। कई लौट जाते हैं। अब कार्ड का ही विकल्प है।
- मयंक, सूट कारोबारी
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pradeep
हमारा कारोबार 50 प्रतिशत रह गया है। शादियों में सीजन में काफी उम्मीदें थी। अब स्वैप मशीनें मंगाई हैं। हालांकि, ज्यादा फायदा अभी नहीं हुआ।
- प्रदीप कुकरेजा, साड़ी कारोबारी
हमारा व्यापार चौपट हो गया है। लोगों के पास बर्तन खरीदने को भी पैसा नहीं है। कार्ड से पेमेंट की सुविधा लाए हैं लेकिन ऐसे ग्राहक काफी कम हैं।
- राजीव गोयल, बर्तन कारोबारी