परिवार में कोई मुखाग्नि देने वाला पुरुष नहीं हो तो बेटियों की ओर से मुखाग्नि देने के कई मामले देखे गए हैं लेकिन उत्तराखंड की एक बेटी ने पिता की उपस्थिति के बावजूद अपनी मां की चिता को मुखाग्नि दी। मंगलवार को हरिद्वार के खड़खड़ी शमशान घाट पर बेटी ने मां को मुखाग्नि दी तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई।
विज्ञापन
तस्वीरों में देखें, बेटी की इच्छा के लिए पिता ने कैसे तोड़ी परंपरा
2 of 4
हल्द्वानी की मैत्री का विवाह जीएमएस रोड, देहरादून निवासी विनय के साथ हुआ था। मैत्री और विनय की दो बेटियां मनीषा और तनीषा हैं। माता-पिता ने अपनी बेटियों को कभी बेटे से कम नहीं समझा। 42 वर्षीय मैत्री काफी समय से बीमार चल रही थी। सोमवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
तस्वीरों में देखें, बेटी की इच्छा के लिए पिता ने कैसे तोड़ी परंपरा
3 of 4
मंगलवार सुबह दाह संस्कार के लिए परिजन मैत्री के पार्थिव शरीर को खड़खड़ी शमशान घाट (हरिद्वार) लेकर पहुंचे। परिवार की रीतियों के मुताबिक सुहागन मैत्री को पति विनय की ओर से मुखाग्नि दी जानी थी लेकिन बड़ी बेटी मनीषा ने मां की अंतिम यात्रा अपने हाथों से पूरी करने की इच्छा जताई।
तस्वीरों में देखें, बेटी की इच्छा के लिए पिता ने कैसे तोड़ी परंपरा
4 of 4
इसी वर्ष 12वीं पास कर चुकी बड़ी बेटी मनीषा की इच्छा को देखते हुए पिता ने जरा भी देर नहीं लगाई और मुखाग्नि का अधिकार बेटी को दे दिया। उसके बाद मनीषा ने मां को मुखाग्नि दी। घाट पर उपस्थित रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों ने मनीषा के जज्बे को सलाम किया। बेटियों के प्रति एक पिता के प्यार और विश्वास की भी सराहना की।