इस बार मकर संक्रांति पर कई महासंयोग एक साथ बनने ये यह और भी खास बन गई है। आज अगर आप इस समय इन चीजों का दान करेंगे तो आपके सारे बिगड़े हुए काम बन जाएंगे।
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मकर संक्रांति
- फोटो : अमर उजाला
आज स्नान-दान और पूजन के लिए पुण्यकाल सिर्फ तीन घंटे 55 मिनट ही रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पुण्य काल में किया गया स्नान-दान अधिक प्रभावकारी होता है। भगवान सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही स्नान-दान और पूजन का पर्व मकर संक्रांति इस साल सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रहा है। सूर्य के राशि बदलने की प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है।
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- फोटो : google
सूर्य अभी धनु राशि में है। 14 जनवरी को धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रांरभ होती है। इसलिए इस पर्व को उत्तरायणी भी कहा जाता है। भले ही 14 जनवरी को सुबह से ही पर्व काल प्रांरभ हो जाएगा। लेकिन पुण्य काल दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू होगा।
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उत्तराखंड विद्वत परिषद के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट ने कहा कि मकर संक्रांति को सूर्य उत्तरायण होने पर गंगा में स्नान और दान का पर्व है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है। ब्रह्म मुहूर्त से गंगा स्नान और पूजन करने से मनुष्य पुण्य का भागी बनता हैं। स्नान एवं दान करना सौ गुना फलदायक होता है।
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इस दिन तिल , गुड़ और खिचड़ी को दान करने का विशेष महत्व है। आप इन चीजों का दान करेंगे और खुद भी इसका सेवन करेंगे तो आपको सौ गुना ज्यादा फल मिलेगा। चावल और काली उड़द की दाल का दान इस दिन जरूर करना चाहिए।
इस दान को आप भगवान सूर्य की पूजा कर जल देकर अर्घ्य देकर निकालें। साथ ही किसी गरीब या पंडित को इसका दान कर दें। ध्यान रहे अगर उपर बताए गए शुभ मुहूर्त में आप दान करेंगे तो अधिक फलदायी होगा।