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जनता कर्फ्यू का एक साल : लोगों ने मानी थी पीएम माेदी की अपील, लेकिन जो घरों से निकले उन्हें पड़े थे लठ

Mon, 22 Mar 2021 12:29 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उत्तराखंड में पहला कोरोना संक्रमित मामला 15 मार्च 2020 को सामने आया था। ठीक एक साल पहले कोरोना का पहला संक्रमित मिलते ही देवभूमि सहम गई। पहले से सजग सरकार ने जनता कर्फ्यू के साथ ही लॉकडाउन लगा दिया था। जिसके बाद राजधानी देहरादून सहित राज्य के सभी इलाकों में सन्नाटा पसर गया था। सड़कों पर इक्का- दुक्का लोग भी दिखाई दे रहे थे। वहीं लॉकडाउन का सबसे अधिक असर शिक्षा जगत पर पड़ा। सत्र शुरु भी नहीं हो पाया था कि स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। कई लोगों के रोजगार छिन गए। कईयों का व्यापार ठप हो गया। रु़द्रप्रयाग में एक युवक ने अपने घर पर शंखनाद करने के बाद जनता कर्फ्यू का एलान किया। पूरे मौहल्ले ने युवक की इस मुहिम का साथ दिया था। ‘जनता कर्फ्यू’ के तहत उत्तराखंड रोडवेज की बसों का संचालन भी ठप था। हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर भी सुबह स्नान और पूजा के लिए लोग नहीं पहुंचे। लगभग सभी घाट खाली दिखे। सबसे ज्यादा पर्यटकों से पैक रहने वाली पहाड़ों की रानी मसूरी की सड़कें भी सुबह से ही वीरान हो गई थीं। गली मौहल्ले भी सूने दिखाई दे रहे थे। ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान आम जनता की सुविधा के लिए सफाई कर्मचारी सड़क पर निकले। उन्होंने शहर के मुख्य चौराहों को सैनिटाइज किया और सभी जगह साफ- सफाई भी की। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने का काम भी किया।
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
लोग घरों में सुरक्षित रहें इसलिए डॉक्टर, पुलिस, सफाई कर्मचारियों और अन्य कोरोना योद्धाओं ने अपना फर्ज अच्छी तरह से निभाया। जहां अधिकतर लोगों ने ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन किया तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी सामने आए जिन्हें पुलिस के लठ खाकर ही अकल आई। लोगों पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन की भी मदद ली गई।
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की अपील को जनता ने सहर्ष स्वीकार किया और परिवार के साथ घर में रहकर समय बिताया। कर्फ्यू के चलते दिवंगत मां का वार्षिक श्राद्ध प्रभावित न हो, इसके लिए उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलेपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (टीडीसी) के अधिकारी डॉ. दीपक पांडे ने अनूठा तरीका अपनाया था। पंडित जी अपने घर से ही वीडियो कॉल पर विधि विधान के साथ उनकी मां के श्राद्ध का अनुष्ठान कराया था।

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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इस दौरान सैकड़ों पर्यटक भी उत्तराखंड में फंस गए थे। जिन्हें बाद में रवाना किया गया था। देहरादून में सबसे ज्यादा व्यस्त इलाका माना जाने वाला घंटाघर क्षेत्र सूना हो गया था। प्रेमनगर बाजार, पलटन बाजार से लेकर कई जगह सड़कें खाली थीं।
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हरिद्वार में मोती बाजार से लेकर ज्वालापुर और लक्सर तक जनता कर्फ़्यू का असर दिखाई दिया था। गढ़वाल में चमोली , रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी से लेकर यमुनोत्री के मुख्य बाजार भी खाली थे। रुद्रपुर के किच्छा हाईवे में ऐसे सन्नाटा पसरा हुआ था। बाजार भी बंद थे।
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
रानीखेत की गलियों और चौबटिया बाजार में सन्नाटा था। हाईवे भी पूरी तरह से खाली था। ‘जनता कर्फ्यू’ के चलते भारत-नेपाल सीमा पर बसा झूलाघाट क़स्बा भी पूरी तरह बंद हो गया था। पिथौरागढ़ के सिल्थाम तिराहे में भी कोई नहीं दिख रहा था। अल्मोड़ा के केमू स्टेशन में भी लोगों की भीड़ नहीं थी। लोग घरों में बंद हो गए थे। 
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जनता कर्फ्यू का एक साल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
अब जब एक बार फिर देश के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। तब भी लोग संभल नहीं रहे हैं। हाल ये है कि बाजारों व सार्वजनिक स्थलों के अलावा परिवहन के साधनों में भी कोविड से बचाव के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं। शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं किया जा रहा है। बुखार या खांसी, जुकाम होने पर लोग खुद ही दवा ले रहे हैं। 
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