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सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 'मोदी सेना' के इस कदम से हिलने लगी कांग्रेस की 'नींव'

Sun, 02 Oct 2016 06:25 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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मनोहर पर्रिकर - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब 'मोदी सेना' का ये कदम कांग्रेस के लिए खतरा साबित हो सकता है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान सियासी बढ़त हासिल करने के लिए भाजपा कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
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- फोटो : AmarUjala
रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के उत्तराखंड में बढ़ते दौरे भी कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भाजपा के ग्राफ में आए बंपर उछाल का ही नतीजा है कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को आनन-फानन में कैबिनेट बुलाकर पूर्व सैनिकों के हित में कई घोषणाएं कर डाली।
 
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मोदी
उधर प्रधानमंत्री मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले से गदगद भाजपा भी कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है वह भी बेहद सुनियोजित तरीके से फौजियों को अपने और करीब लाने की मुहिम में जुटी है। 
 

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हरीश रावत - फोटो : Self
उत्तराखंड में सैनिकों और अर्द्धसैनिकों की पांच लाख का संख्या बल विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर प्रत्याशियों का भविष्य तय करने के साथ सरकार बनाने की स्थिति में है। राज्य गठन के बाद तीन लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो सैनिकों के पोस्टल बैलेट का 80 फीसदी भाजपा को मिलता रहा है। कुमाऊं की अपेक्षा गढ़वाल में पूर्व सैनिकों की संख्या दोगुने से अधिक है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
गढ़वाल में पौड़ी, टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी जनपद में दो दर्जन से अधिक सीटें फौजी मतों से प्रभावित हैं। जबकि कुमाऊं में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल में पूर्व सैनिकों का अच्छा खासा मत है।
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veer chandra singh garhwali - फोटो : AmarUjala
रक्षा मंत्री के वॉर मेमोरियल के बाद शहीद वीर चंद्र गढ़वाली की प्रतिमा के अनावरण से मिली सियासी पटखनी और पीओके में सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से फौजियों के दिल और दिमाग पर जबरदस्त लीड ले चुकी मोदी सरकार का तोड़ निकालने में प्रदेश सरकार जुट गई है। इस कड़ी में जहां कांग्रेस एक बड़े ‘फौजी’ चेहरे को तलाश रही हैं वहीं पूर्व सैनिकों के बीच बढ़त बनाने को कांग्रेस व्यापक अभियान छेड़ने की भी तैयारी कर रही है।
 
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veer chandra singh garhwali - फोटो : AmarUjala
फौजियों में भाजपा की लीड की काट के तौर पर कांग्रेस वॉर मेमोरियल में अपनी हिस्सेदारी के साथ विधानसभा का नाम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए कमेटी बनाकर फौजियों में सियासी घुसपैठ करने में लग गई है। साथ ही कांग्रेस वन रैंक वन पेंशन और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से केंद्र सरकार के प्रति पूर्व सैनिकों की नाराजगी को भी भुनाना चाह रही है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
उधर, भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रि) के अलावा आधा दर्जन पूर्व सैन्य जनरल हैं, जिनका प्रभाव लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पड़ता है। अब कांग्रेस फिर से जनरल टीपीएस को एक कमेटी का अध्यक्ष बनाकर उन्हें पार्टी का चेहरा बना रही है। लाखों की तादात चिंता का कारण: पौने दो लाख पूर्व सैनिक और वीर नारियां, 80 हजार सेना में कार्यरत सैनिक, सर्वाधिक फौजी पौड़ी-टिहरी-अल्मोड़ा-देहरादून और नैनीताल में, डेढ़ लाख पूर्व और कार्यरत अर्द्धसैन्य बलों की संख्या।
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