पौड़ी जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर बसे मरोड़ा गांव में बादल फटने से पूरा गांव दो हिस्सों में बंट गया। ये तस्वीरें आपदा का सारा किस्सा कह रही हैं।
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cloud burst in pauri
- फोटो : AmarUjala
सोमवार को रोज की तरह खूब चहल-पहल थी। दोपहर करीब दो बजे से बारिश शुरू हुई। करीब चार बजे अचानक बारिश की रफ्तार बढ़ने लगी। मूसलाधार बारिश के बीच गांव के ठीक ऊपर बीचोंबीच में बादल फटने से गांव दो हिस्सों में बंट गया।
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- फोटो : AmarUjala
ढलान होने के चलते बरसाती पानी मलबा, बोल्डरों, पेड़ों जो भी रास्ते में आता उसे चपेट में लेते हुए पूरे वेग के साथ बहने लगा। इस हिस्से में ग्रामीणों की गोशालाएं बनी थीं। गोशालाओं में बंधे मवेशी भी बहने लगे। आसपास के घरों से लोगों ने सुरक्षित ठौर की ओर भागकर अपनी जान बचाई।
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- फोटो : AmarUjala
गांव में दुकान चलाने वाले सुखदेव सिंह रावत अन्य दिनों से पहले ही दुकान बंद करके घर चले गए थे। सुखदेवसिंह घर की देहरी पर भी नहीं पहुचे थे कि इस बीच बादल फटने से आए मलबे में उनकी दुकान दब गई।
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- फोटो : AmarUjala
गांव के ऊपर से मलबा तुंण, खड़ीक व अन्य पेड़ों को उखाड़ते हुए गांव की ओर बढ़ा तो ग्रामीण घरों को छोड़कर खेतों की तरफ भाग लिए जिससे कई जानें बच गई। ग्रामीण प्रेमबल्लभ पंत बताते हैं कि पहले इतनी तेज बारिश उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी।
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- फोटो : AmarUjala
ग्रामीणों की आवाजाही के करीब पांच पुल आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करके फिलहाल आवाजाही के लिए दो रास्ते बनाए हैं। यह रास्ते अभी कामचलाऊ हैं।
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गांव के बीच में स्थित पेयजल स्रोत जो कि सोमवार की आपदा में मलबे में दब गया था। उसे ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करके मंगलवार को खोल दिया है। हालांकि स्रोत से बहने वाले पानी को एकत्र करने वाला पंदेरा (नौला) आपदा में बह गया है। स्रोत से जैसे-तैसे पानी भर रहे हैं। स्रोत तक आने-जाने का रास्ता भी आपदा में बह गया था। उसे देर शाम करीब सात बजे तक बनाने का कार्य चलता रहा।
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ग्रामीणों ने सोमवार को ही शिपाल सिंह रावत की छानी मलबे की जद में आ गई थी। ग्रामीणों ने छानी में बंधी दुधारु गाय और बकरी को सकुशल बचा लिया।
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रुपसिंह, दयाल सिंह, सुखदेव सिंह, रवींद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह रावत, गोविंद सिंह बिष्ट समेत करीब दस परिवारों के शौचालय बह गए हैं। इनके मकान खतरे की जद में हैं। इन परिवारों ने पड़ोसियों के यहां शरण ले रखी है।
ग्रामीण प्रेमबल्लभ पंत ने बताया कि हम लोग सभी मिलजुलकर आपदा राहत कार्यों में जुटे हैं। इसमें सरकार की ओर से जल्द मदद मिल सके तो ग्रामीण फिर से संभल जाएंगे।