सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ मंगलवार से शुरू हो गया। चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व पर 34 साल बाद महासंयोग बना है। इससे शनि और राहु की कृपा बनी रहेगी।
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chhath
आचार्य बिपिन जोशी के अनुसार छठ महापर्व के पहले दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी और सूर्य का रवि योग भी है। ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बन रहा है। रवि योग में छठ की विधि-विधान शुरू करने से भगवान सूर्य हर मनोकामना भी पूरी करते हैं।
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shani dev
चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, शनि-राहु कितने ही भारी क्यों न हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाता है। ऐसे में महासंयोग में यदि सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हवन किया जाए तो आयु बढ़ती है।
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छठ पूजा
पहले दिन नहाय-खाय के साथ छठ की शुरुआत होती है। मान्यता है कि पूरी निष्ठा के साथ पर्व का परायण करने वाले की हर मन्नत पूरी होती है। इसके अलावा संतान चाहने वाले दंपत्तियों की सूनी गोद भर जाती है। इस व्रत को धारण करने में विशेष शुद्धता और सफाई का विधान है। इसके चलते मंगलवार को नहाय-खाय के पहले लोगों ने घरों की सफाई की और विधि-विधान से व्रत का संकल्प लिया। वहीं व्रतियों ने अपना बिस्तर फर्श पर लगा लिया जो व्रत पूर्ण होने तक जमीन पर ही सोएंगे।
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वाराणसी में छठ
वहीं दूसरी ओर महापर्व के पहले दिन बिहारी महासभा की ओर से टपकेश्वर मंदिर के पास तमसा नदी की सफाई की गई और टूटे-फूटे घाटों की मरम्मत कर कुछ नए घाट बनाए गए। अभियान में डा. रंजन कुमार, सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, एसके सिन्हा, आलोक सिन्हा आदि शामिल थे। सुबह से शाम तक चले इस अभियान के बीच कद्दू-भात बांटा गया।
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रामलीला मैदान स्थित छठ घाट पर सूर्य की उपासना करती व्रती महिलाएं।
बिहारी महासभा के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि नहाय-खाय के दिन घरों में पीतल के बर्तन में लौकी, कद्दू-भात बनाया गया। अब बुधवार को खरना का आयोजन होगा। जिसमें घरों में गुड़ की खीर का प्रसाद बनेगी। इस मौके पर महासभा के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ आईएएस उत्पल सिंह के मुख्य सचिव बनने पर हर्ष व्यक्त किया एवं उनको सभा के कार्यक्रम में अर्घ्य देने के लिए आमंत्रित किया।
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Chhath Pooja 2017
बुधवार को खरना होगा। इसमें गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन व्रत शुरू हो जाएगा। बृहस्पतिवार को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य और शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का समापन होगा।
बिहारी महासभा के पदाधिकारियों को जैसे ही यह जानकारी मिली कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 26 अक्तूबर को उत्तराखंड में हैं तो उन्होंने पीएमओ को एक पत्र भेज दिया। पत्र में प्रधानमंत्री को छठ पूजा में शामिल होने और यहां आकर अर्घ्य देने के लिए आमंत्रित किया गया है। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री यहां आएं, हमारी परंपरा का हिस्सा बनें, इससे हम सबको नई ऊर्जा मिलेगी।