उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी एक सभा में हाथ से लिखे नोट से पढ़कर भाषण देते नजर आए।
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मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत देहरादून के परेड ग्राउंड में प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े 27 हजार से ज्यादा शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।
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इस दौरान उनके हाथ में एक नोट पैड दिखा, जिसमें कुछ नोट लिखा हुआ था।
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अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े 27 हजार से अधिक टीचर सामूहिक अवकाश पर रहे। टीचरों ने परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच का एलान किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने टीचरों के बीच आकर उनकी मांगों पर अमल का आश्वासन दिया।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार टीचरों का अहित नहीं होने देगी। पेंशन प्रकरण के मामले में वे कोर्ट नहीं जाएगी। कोर्ट में दाखिल याचिका वापस ली जाएगी। वहीं टीचरों के 4000 पदों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। अन्य मांगों का भी शीघ्र समाधान निकाला जाएगा।
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लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े हजारों टीचर मंगलवार को चंपावत, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी और अल्मोड़ा समेत विभिन्न जनपदों से परेड ग्राउंड पहुंचे, लेकिन इससे पहले की टीचर सचिवालय कूच करते। मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में टीचरों के बीच आकर उनकी मांगों पर अमल का आश्वासन दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर टीचरों का अहित नहीं होने देगी। टीचरों को पदों को लेकर होने वाले नुकसान की भरपाई का तरीका निकाला जाएगा। उच्चीकृत वेतन 6500 के आधार पर प्राथमिक टीचरों का एंट्री स्केल 16290 करने और अन्य मांगों का शीघ्र ही शिक्षक संगठन पदाधिकारियों को बुलाकर समाधान निकाला जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमोशन के मामले में अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। जो इस माह के अंत तक रिपोर्ट दे देगी। उन्होंने कहा कि टीचरों की मांग को पूरा करने के लिए 80-90 करोड़ रुपये भले लग जाएं, सरकार टीचरों का अहित नहीं होने देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सातवें वेतन आयोग को शीघ्र लागू किया जाएगा। इसमें भले दो से तीन हजार करोड़ रुपये क्यों न लगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने मार्च में पहला बजट पेश किया। वहीं, छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को भी दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक और कर्मचारियों का कोई वर्ग ऐसा नहीं रहेगा, जिसे वेतन विसंगति का सामना करना पड़े। वेतन विसंगति पर मुख्यमंत्री ने अब तक रहीं सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि शिक्षकों का उन्हें जो गुस्सा झेलना पड़ रहा है, इसमें उनकी गलती नहीं है। अब तक की सरकारों ने इसे दूर करने का काम नहीं किया।