देश के कानून एवं संविधान के तहत चोरी करने पर सजा का प्रावधान है, अगर वह भी मंदिर में की हो तो आप सोच लो कि अपराधी का क्या होगा, लेकिन इसके ठीक उलट एक मंदिर ऐसा भी है जहां चोरी करने से सजा नहीं बल्कि मनचाही मुराद पूरी होती है।
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जी हां चुड़ियाला स्थित प्राचीन सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर में चोरी करने वाले भक्तों को माता सजा नहीं, बल्कि उनकी पुत्र रत्न प्राप्ति की इच्छा पूरी करती है।
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मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव शंकर को आमंत्रित नहीं किए जाने से क्षुब्ध माता सती ने यज्ञ में कूदकर यज्ञ को विध्वंस कर दिया था।
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भगवान शिव जिस समय माता सती के मृत शरीर को उठाकर ले जा रहे थे, उसी समय माता सती का चूड़ा इस घनघोर जंगल में गिर गया था। तभी से इसी स्थान पर माता की पिंडी स्थापित होने के साथ ही भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।
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यहां पुत्र प्रप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति मंदिर में आकर माता के चरणों से लोकड़ा (लकड़ी का गुट्टा) चोरी करके अपने साथ ले जाते हैं और पुत्र रत्न प्राप्ति के बाद अषाढ़ माह में अपने पुत्र के साथ ढोल नगाड़ों सहित मां के दरबार मे पहुंचते हैं। जहां भंडारे के साथ ही दंपति चुराए गए लोकड़े के साथ ही एक अन्य लोकड़ा भी अपने पुत्र के हाथों से चढ़ाते हैं।
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मंदिर के पुजारी पंडित अनिरुद्ध शर्मा एवं मां चूड़ामणि देवी ट्रस्ट के संरक्षक सतवीर त्यागी, अध्यक्ष राजेश त्यागी, कोषाध्यक्ष विनित त्यागी, सचिव नरेश त्यागी, उपाध्यक्ष नीरज आदि बताते हैं कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल में शिकार करने आए हुए थे। जंगल में घूमते-घूमते उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए।
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राजा के यहां कोई पुत्र नहीं था। राजा ने उसी समय माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। पुत्र प्राप्ति के बाद राजा ने सन 1805 में मंदिर का भव्य निर्माण कराया। देवी के दर्शनों के लिए उपस्थित हुई रानी ने माता शक्ति कुंड की सीढ़ियां बनवाई।
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जहां आज भव्य मंदिर बना हुआ है। यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। जहां शेरों की दहाड़ सुनाई पड़ती थी। पुराने जानकार बताते हैं कि माता की पिंडी पर रोजाना शेर भी मत्था टेकने के लिए आते थे।
माता चूड़ामणि के अटूट भक्त रहे बाबा बण्खंडी का भी समाधि स्थल मंदिर परिसर में है। बताया जाता है कि बाबा बण्खंडी महान भक्त एंव संत हुए हैं। इन्होंने सन1909 में माता की भक्ति में लीन होते हुए समाधि ले ली थी।