शनिवार को घाटों का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय दिखा। व्रती पारंपरिक छठ गीतों मारबऊ रे सुगवा धनुष से, चला छठी माई के घाट, हे छठि माई, हे छठि माई, हम हई इहां परदेश में, आइल छठि के बरत... केरे उठायई माथे सुपवा, दउरवा, केरे करत घाट भराई... पटना के घाट पर हमहूं अरगिया देबहि हे छठी मइया... आदि गीत गाते हुए पहुंचे।