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Chhath Puja in Uttarakhand : गीत-गवनई के साथ व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य, बिखरी छठ की छटा, तस्वीरें...

Sat, 21 Nov 2020 09:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : amar ujala
उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही शनिवार यानि आज सुबह सूर्य उपासना के महापर्व छठ के चार दिनी कठिन अनुष्ठान का समापन हो गया। इसके बाद व्रती महिलाओं ने पारण कर ठेकुआ का प्रसाद बांटा। 
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- फोटो : amar ujala
कच्चे बांस के सूप में सिंघाड़ा, नारियल, फल, कच्ची हल्दी, मूली, गन्ना समेत पूजन सामग्री सिर पर लेकर जाते पुरुष और ‘कांचहि बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए’ समेत छठ के अन्य गातीं महिलाएं... शनिवार सुबह घाटों पर यह दृश्य देखते ही बन रहा था।
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- फोटो : amar ujala
पूजा-अर्चना के बाद व्रती महिलाओं ने कमर भर पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया। साथ ही पति की दीर्घायु और संतान सुख की कामना की।

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- फोटो : amar ujala
ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि चार दिवसीय लोकआस्था के महापर्व के अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है जिसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है। 
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- फोटो : amar ujala
गुरुवार को खरना के बाद से व्रत करने वाली महिलाओं ने 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू कर दिया था। रातभर उन्होंने छठी मइया की आराधना की। घर-घर छठी मइया के गीत गाए जा रहे थे।
 
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- फोटो : amar ujala
शनिवार को घाटों का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय दिखा। व्रती पारंपरिक छठ गीतों मारबऊ रे सुगवा धनुष से, चला छठी माई के घाट, हे छठि माई, हे छठि माई, हम हई इहां परदेश में, आइल छठि के बरत... केरे उठायई माथे सुपवा, दउरवा, केरे करत घाट भराई... पटना के घाट पर हमहूं अरगिया देबहि हे छठी मइया...  आदि गीत गाते हुए पहुंचे। 
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व्रत में चावल और गुड़ की खीर बनाने की परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है। ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री व पीयूष भटनागर ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, सूर्य की कृपा से ही फसल होती है।
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- फोटो : amar ujala
इसलिए सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण करना चाहिए। छठ पर्व के समय चावल और गन्ना तैयार होकर घर आता है। इसलिए गन्ने से तैयार गुड़ और नए धान के चावल का प्रसाद सूर्य देव को भेंट किया जाता है।
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