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छठ पूजा 2018: निर्जला व्रत रखकर व्रतियों ने की सूर्य उपासना, अर्घ्य देकर मांगी मनौतियां, तस्वीरें...

Wed, 14 Nov 2018 08:41 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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छठ पूजा 2018 देहरादून
छठ मैया के गीत गाते हुए और दीप जलाकर पूर्वांचल की हजारों व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के दर्जनों घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं ने गंगा में पूजा अर्चना की और सूर्य को अर्घ्य दिया। शाम को घाटों पर जमकर आतिशबाजी की गई। सोमवार की शाम से निर्जल व्रत रखने वाले हजारों महिलाएं और पुरुष मंगलवार को तीसरे पहर गंगा घाटों की तरफ उमड़े। 
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छठ पूजा 2018 देहरादून
हरकी पैड़ी पर भव्य पंडाल सजाया गया था। हरकी पैड़ी के साथ-साथ मलवीय द्वीप, सुभाष घाट, रोडी बेलवाला घाट, कुशा घाट, विष्णु घाट, विश्वकर्मा घाट, ऋषिकुल घाट, सिंहद्वार घाट, कबीर घाट, खन्ना नगर घाट, प्रेम नगर आश्रम घाट, ज्वालापुर के दुर्गा घाट, सीता घाट, वाल्मीकि घाट, रविदास घाट, कनखल के दक्ष घाट, सतीघाट, उत्तरी हरिद्वार के परमार्थ घाट, अग्रसेन घाट, सर्वानंद घाट आदि पर छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। इन घाटों पर छठ मैया के गीत गाते हुए श्रद्धालु आस्था के साथ चल रहे थे। आने वाले के सिर पर डाले रखे हुए थे। घाट पर पहुंचकर सभी ने गंगा स्नान किया। मिट्टी की वेदी बनाकर छठी मैया का गीतों के माध्यम से आह्वान किया। घाटों पर ही उनका पूजा किया गया। 
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छठ पूजा 2018 देहरादून
सूर्य के अस्त होने की प्रतीक्षा में तमाम घाटों पर गीतों की गंगा बहती रही। व्रती श्रद्धालुओं ने अस्त होते सूर्य को गंगा कमर तक भीगकर  अर्घ्य अर्पित किया। गंगा जल के साथ-साथ सूर्य देव को दूध भी अर्पित किया गया। फलों के डाले लिए व्रती श्रद्धालु गंगा जल में परिक्रमा कर रहे थे। जैसे-जैसे सूर्य देव ने अस्त होना शुुरू किया, गीतों का वेग बढ़ता चला गया। सभी घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए डाले और टोकरे सजाए गए थे। ईख लगाकर डालों के दोनों ओर छोटे-छोटे द्वार बनाए गए।  मंगलवार की सारी रात गीतों में बीतेगी। सवेरे चार बजे से श्रद्धालु गंगा के उन्हीं तटों पर पहुंचने लगेंगे। उगते सूर्य अर्घ्य प्रदान करने के बाद चार दिन लंबे इस पर्व का समापन होगा।  

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छठ पूजा 2018 देहरादून
द्रोणनगरी में छठ का व्रत करने वाली महिलाओं ने पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। मंगलवार को शहर छठ के रंग में रंगा रहा। शहर में कई जगहों पर बनाए गए घाटों पर छठ पूजन किया गया। व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही विधि-विधान से पूजन किया। साथ ही जगत कल्याण और अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। इस मौके पर छठ मैया के गीतों से माहौल भक्तिमय हो गया।  
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छठ पूजा 2018 देहरादून
शहर में मुख्य आयोजन बिहारी महासभा की ओर से टपकेश्वर मंदिर परिसर में किया गया। साथ ही सभा की ओर से प्रेमनगर, मालदेवता, क्लेमेंटटाउन समेत 22 जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। टपकेश्वर मंदिर परिसर में दोपहर से ही श्रद्धालुओं के आने का दौर शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ बांस के सूप और टोकरे में फल, सब्जी लिए घाट पर पहुंचीं। महिलाओं ने शाम को तमसा नदी के जल में खड़े होकर सूरज को अर्घ्य दिया। इस दौरान पहिले पहिल छठी मइया..., सुनि लेहु अरज हमार हे छठी मइया...आदि गीतों से माहौल भक्तिमय हो गया।
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छठ पूजा 2018 देहरादून
राजधानी में मंगलवार को छठ पर्व की रौनक रही। इस मौके पर बिहारी महासभा के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने कहा कि छठ पर्व भारतीय संस्कृति का एक बड़ा उदाहरण है। यह सबसे अनूठा पर्व है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सिर्फ उगते हुए सूरज की पूजा करते हैं लेकिन सनातन हिंदू संस्कृति में छठ पर्व पर डूबते हुए सूर्य की भी पूजा होती है। इसका अर्थ है कि हिंदू धर्म के लोग आने-जाने वालों को समान भाव से देखते हैं। छठ पर्व पर क्लेमेंटटाउन में व्रती महिलाओं ने तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया। पूजा स्थल मछली तालाब में छठ सेवा समिति की ओर से सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तैयारी की गई। यहां व्यवस्था में सेना का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर समिति के संरक्षक महेश पांडे, अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, गोरखनाथ, शिव कुमार, वीरसेन कश्यप, मोहन जोशी आदि मौजूद रहे।
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