22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल से बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने वाले हैं, लेकिन इससे पहले ही सिरोहबगड़ से रुद्रप्रयाग तक का 15 किमी सफर यात्रियों की अग्नि परीक्षा लेगा। सड़क मार्ग पर उड़ता धूल का गुबार नई चुनौती है। साढ़े पांच दशक से संवेदनशील बना सिरोहबगड़ इस बार भी यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
भूस्खलन जोन के ट्रीटमेंट के लिए 95.12 करोड़ की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। हालिया बारिश के बाद यहां सड़क पर मलबा और दलदल की स्थिति बनी है, जो यात्रा के दौरान फिर खतरा बनेगी। पास ही सड़क का पुश्ता भी ध्वस्त है। इसका निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
सिरोहबगड़ से खांखरा तक करीब 3 किमी में 4 सक्रिय भूस्खलन जोन हैं। यहां सड़क उबड़-खाबड़ है और गड्ढों से भरी हुई है। खांखरा से नौगांव के बीच निर्माणाधीन बाईपास कार्य अधूरा है और पहाड़ी कटान जारी है। नौगांव से नरकोटा तक 7 सक्रिय भूस्खलन जोन हर साल की तरह इस बार भी खतरा बने हुए हैं। नरकोटा सिग्नेचर ब्रिज के पास नया भूस्खलन जोन बन गया है, जहां लगातार बोल्डर गिर रहे हैं और इसका समाधान नहीं किया गया है।