18 मई मंगलवार को केदारनाथ के क्षेत्रपाल के रूप में पूजनीय आराध्य भगवान भैरवनाथ के कपाट खुलने के साथ ही भगवान केदारनाथ की सायंकालीन आरती भी शुरू हो जाएगी। इसी दिन आराध्य के स्वयंभू लिंग पर नए स्वर्ण मुकुट को भी सुशोभित किया जाएगा।
रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा 900 ग्राम के इस स्वर्ण मुकुट के संरक्षण की जिम्मेदारी देवस्थानम बोर्ड को सौंपी गई है। केदारनाथ के 1008 रावल भीमाशंकर लिंग ने शीतकाल में 900 ग्राम स्वर्ण मुकुट का बंगलूरू में निर्माण कराया है।
इस स्वर्ण मुकुट को लेकर खास बात यह है कि देवताओं में बाबा केदार और मनुष्य में सिर्फ केदारनाथ के रावल ही इसे धारण करते हैं। बीते 7 मई को पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में प्रशासन, पुलिस, देवस्थानम बोर्ड और हक-हकूकधारियों की संयुक्त बैठक में रावल भीमाशंकर लिंग ने इस नए स्वर्ण मुकुट का अनावरण किया था।
जबकि बीते 14 मई को बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान से पूर्व स्वर्ण मुकुट को गर्भगृह में पूजा-अर्चना के बाद हवन से शुद्ध किया गया था। इसके बाद पंचकेदार गद्दीस्थल में रावल द्वारा स्वयं पंचमुखी भोगमूर्ति पर यह स्वर्ण मुकुट सुशोभित किया गया।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
आज, सोमवार को केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। जबकि 18 मई को केदारनाथ के क्षेत्रपाल भगवान भैरवनाथ के कपाट भी खुल जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की सायंकालीन पूजा-अर्चना व आरती भी शुरू हो जाएगी।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
इसी दिन अपराह्न में भगवान केदारनाथ के स्वयंभू लिंग का श्रृंगार कर स्वर्णमुकुट सुशोभित किया जाएगा, जिसके दर्शन सायंकालीन आरती में होंगे।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
पुजारी शिव शंकर लिंग ने बताया कि केदारनाथ में भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद प्रतिदिन दोपहर बाद मंदिर की साफ-सफाई व हवन के उपरांत आराध्य बाबा केदार को भोग लगाने के बाद श्रृंगार कर यह स्वर्ण मुकुट सुशोभित किया जाता है।
यह मुकुट सायंकालीन आरती के बाद उतारा जाता है। जबकि धाम के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की डोली के साथ स्वर्णमुकुट को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचाया जाता है। जहां छह माह केदारनाथ के रावल विशेष धार्मिक आयोजनों में धारण करते हैं।