देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत उत्तराखंड के सीमांत गांवों की बहुत फिक्र करते थे। उन्हें राज्य सरकार के हुक्मरानों और नीति नियंताओं से जब-जब बात करने का अवसर मिला, उन्होंने सीमांत गांवों के विकास के लिए सुझाव दिए। उन्हीं के सुझाव पर उत्तराखंड सरकार ने सीमांत क्षेत्र विकास निधि बनाई ताकि राज्य की सरहद पर बसे गांवों में अवस्थापना विकास और आजीविका आधारित योजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।
उन्हें उत्तराखंड की बहुत चिंता रहती थी
उत्तराखंड पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते हैं, उन्हें उत्तराखंड की बहुत चिंता रहती थी। विशेषकर सीमांत गांवों को लेकर। वे यह जानना चाहते थे कि सीमांत गांवों का विकास कैसे हो? हमने रैबार कार्यक्रम किया तो वह पूरे समय रहे और अपने सुझावों को साझा किया। पलायन को लेकर उनके दिमाग योजना थी। उनका सुझाव था कि बागवानी के माध्यम से पलायन का रोका जा सकता है। उनके प्रयासों से चमोली और पिथौरागढ़ में अखरोट की नर्सरी लगाई गईं और स्थानीय ग्रामीणों को पौधे दिए गए।
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जनरल रावत का मानना था कि राज्य के पर्वतीय और सीमांत इलाकों में अखरोट व अन्य फलों की अगेती(अर्ली) किस्में उपलब्ध कराए जाने से स्थानीय लोगों की आमदनी में सुधार होगा और उन्हें आजीविका के लिए अपने घर बार नहीं छोड़ने पडेंगे।बकौल त्रिवेंद्र, जनरल रावत श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को और अधिक सुविधा संपन्न बनाए जाने को लेकर भी प्रयासरत थे।