सीडीएस बिपिन रावत हमेशा पौधों के रूप में उत्तराखंड के लोगों के बीच रहेंगे। उनकी पहल पर सेना ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में दस हजार से ज्यादा फलों के पौधे लगाए थे। उनमें से ज्यादातर अगले कुछ वर्षों में फल देने लगेंगे। इसके अलावा सेना में लंबाई में पांच सेमी की छूट दिलाने के लिए भी उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रयास किए थे। इस छूट का लाभ उठाकर प्रदेश के कई युवाओं ने सेना में भर्ती होने का अपना सपना पूरा किया है।
सीडीएस बिपिन रावत हमेशा प्रदेश के ग्रामीणों की कमजोर आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयासों में जुटे रहे। वो अक्सर कहते थे कि कश्मीर और उत्तराखंड की स्थिति काफी हद तक एक जैसी है। लेकिन कश्मीर के लोगों की आर्थिक स्थिति हमसे बहुत बेहतर है। क्योंकि वहां बड़ी संख्या में फलों के पेड़ लगे हुए हैं, जिनसे बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है।
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इसके अलावा कई सूखे मेवे भी वहां उगते हैं। हर साल वहां के लोग लाखों रुपये के फल बेचते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी फलों के पौधे लगाए जाएं तो अगले कुछ वर्षों में यहां भी अच्छा-खासा उत्पादन होने लगेगा। इसकी पहल करते हुए उन्होंने सैनिकों की मदद से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दस हजार से ज्यादा फलों के पौधे लगाए थे। दुर्घटना के बाद वह हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन यह पेड़-पौधे हमेशा हमारे साथ रहेंगे और उनकी व उनके कार्यों की याद दिलाते रहेंगे।