कैशलेस अभियान के साथ ही बैंकों में चेक का प्रचलन बढ़ा है। पर सर्वर की धीमी रफ्तार के चलते चेक क्लियरेंस में दिक्कतें आ रही हैं। ओरिएंटल बैंक में तो सर्वर डाउन होने की वजह से कई दिन चेक क्लियरेंस अटकी रही। एसबीआई, पीएनबी समेत तमाम बैंकों में चेक क्लियरेंस की रफ्तार धीमी है।
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रुपये के लिए बैंक में खड़े लोग।
- फोटो : Amar Ujala
कैश की भारी किल्लत और केंद्र सरकार के कैशलेस अभियान की वजह से लोगों में चेक का प्रचलन बढ़ा है। बैंकों पर पहले के मुकाबले चेक का तीन गुना लोड बढ़ गया है। चूंकि सर्वर उस हिसाब से अभी तैयार नहीं हैं, लिहाजा चेक क्लियरेंस में देरी हो रही है। उधर, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का सर्वर कई दिन से ठप पड़ा होने से लोगों के चेक वापस चले गए।
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भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी कतार।
हालांकि बृहस्पतिवार को सर्वर चलना शुरू हुआ है। एसबीआई, पीएनबी सहित सभी बैंकों में चेक का लोड तीन गुना बढ़ गया है। पहले अगर औसतन एक माह में 100 चेक बैंक में आते थे, तो अब इनकी संख्या 300 से 350 बढ़ गई है। इससे बैंकों के सर्वर पर भी लोड बढ़ रहा है। पीएनबी के चीफ मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि थोड़ा असर चेकों की संख्या बढ़ने से जरूर हुआ है, लेकिन चेक क्लियरेंस हो रही है।
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money
दूसरी ओर, एसबीआई के ब्रांच मैनेजर विनय कुमार खत्री ने बताया कि चूंकि कई बैंकों के सर्वर में समस्या है, इसलिए चेक क्लियरेंस पर असर पड़ रहा है। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के मैनेजर वीके जोशी ने बताया कि सर्वर डाउन होने की वजह से चेक क्लियरेंस नहीं हो पा रही थी, अब सर्वर ठीक हो गया है। ग्राहकों को परेशानी नहीं होगी।
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cashless
देहरादून के प्रकृति विहार निवासी अरुण एक शॉपिंग मॉल से घर का सामान खरीदने गए। उनका बिल 1800 रुपये का बना। उन्होंने बिलिंग काउंटर पर अपना डेबिट कार्ड स्वैप करने को दिया। करीब दस मिनट तक बार-बार स्वैप करने के बावजूद जब कार्ड नहीं चला तो काउंटर संचालिका ने दो घंटे बाद बुलाया। अरुण दो घंटे बाद आए और कार्ड स्वैप कर सामान ले पाए।
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cashless
देहरादून के विद्या विहार निवासी अनिल ने पलटन बाजार में एक दुकान से कोट खरीदा। बदले में उन्होंने दो हजार रुपये अपने डेबिट कार्ड से स्वैप कराए। स्वैप मशीन में कनेक्टिविटी एरर आ गया और अनिल के खाते से पैसा कट गया। लेकिन दुकानदार के खाते में कोई पैसा जमा नहीं हुआ। अब अनिल अपने दो हजार के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।
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एटीएम
- फोटो : concept photo
देहरादून के टीएचडीसी कॉलोनी निवासी अतुल ने बिग बाजार में 650 रुपये की शापिंग की। पेमेंट के लिए पीएनबी का एटीएम दिया, लेकिन स्वैप मशीन में एरर होने से ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। फिर उन्होंने कैश दिया। लेकिन बाहर निकलते ही उनके खाते से 650 रुपये कटने का मैसेज आ गया। पैसे वापस पाने को वे पीएनबी गए, जहां उन्हें कस्टमर केयर पर संपर्क करने को कहा गया।
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कैशलैस
ये तीन तो महज उदाहरण हैं, हर दिन स्वैप मशीनों में कनेक्टिविटी की समस्या कैशलेस अभियान को झटका दे रही है। लोग बिना कैश के खरीदारी करने जाते हैं, लेकिन कार्ड से ट्रांजेक्शन न होने से परेशान होकर लौट आते हैं। दरअसल, शहर में कई जगहों पर कनेक्टिविटी और सर्वर का लोड परेशानी बढ़ा रहा है।
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देशभर में कैशलेस अभियान तेजी से प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। राजधानी में भी जागरुकता बढ़ रही है। लोग अब कैश से खरीदारी के बजाय क्रेडिट और डेबिट कार्ड से खरीदारी कर रहे हैं। शाम को लोग फ्री होकर जब बाजार पहुंचते हैं तो इतनी खरीदारी होती है कि सर्वर पर लोड बढ़ जाता है। इस वजह से ट्रांजेक्शन बीच में ही अटक रही है।
बैंकों के पास लगातार ऐसे मामले भी बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें उनके खाते से स्वैपिंग का पैसा तो कट जाता है, लेकिन दुकानदार के खाते में नहीं पहुंच रहा है। पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी अनिल खोसला का कहना है कि अगर कई बार ऐसा हो भी जाए तो अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और 48 घंटे में आमतौर पर ऐसा पैसा उनके खाते में वापस भी आ जाता है। इसके बाद भी नहीं आता तो बैंक से शिकायत करें।