कर्ज के बोझ तले दबे बेरोजगार बाप ने अपनी तीन बेटियों को जबरन जहरीला पदार्थ खिला दिया और पत्नी के मुंह में जहर की गोली ठूंसने के बाद खुद भी गोली खा ली। एक बेटी ने जहर फौरन थूक दिया, जबकि बेटा जहर खिलाते बाप का हाथ झटककर घर से बाहर भाग गया।
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जब वह मकान मालिक के बेटे और अन्य लोगों को लेकर घर लौटा तो उसके पिता अंशुमान सिंह और बड़ी बहन दिव्यांशी की मौत हो चुकी थी, जबकि मां सरिता और उसकी छोटी बहन हिमांशी की हालत गंभीर थी। एंबुलेंस 108 सेवा की मदद से दोनों को राजकीय चिकित्सालय भेजा गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस अंशुमान के परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश में जुटी है। काशीपुर उत्तराखंड में बेटी दिव्यांशी के साथ खुदकुशी करने वाला अंशुमान 9 वर्ष पहले यहां तुलसीनगर काकादेव में रहता था। उसके पिता योगेंद्र प्रताप सिंह की सरकारी गल्ले की दुकान थी। जनवरी 2009 में पिता की मौत के बाद अंशुमान के नाम दुकान आवंटित हो गई। पांच महीने बाद दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। आरोप लगा था कि अंशुमान ने सरकारी खाद्यान्न राशन कार्ड धारकों की बजाए किसी और को बेच दिया था। दुकान निरस्त होने के बाद अंशुमान परिवार के साथ 2011 में गृह जनपद लालगंज रायबरेली चला गया था। एक वर्ष पहले वह परिवार के साथ काशीपुर शिफ्ट हुआ था।
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himanshi
कानपुर के काकादेव एन ब्लाक के तुलसीनगर कॉलोनी के रहने वाले अंशुमान सिंह (42) पुत्र स्व. योगेंद्र प्रताप सिंह दो वर्ष पहले पत्नी सरिता, तीन बेटियों और एक बेटे संग यहां आकर कुंडा थाने के ग्राम हरियावाला में रहने लगा था। शुरू में वह गांव के मलुआ के घर में रहा। पति-पत्नी मुरादाबाद रोड पर अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करते थे। बाद में पत्नी ने नौकरी छोड़ दी। किराए की किच-किच के चलते अंशुमान को मलुआ का मकान छोड़ना पड़ा।
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Arya
बीती जनवरी से वह अतुल यादव के मकान में रह रहा था। अंशुमान ने कहीं भी टिककर काम नहीं किया। उसने कभी फैक्ट्री, कभी नर्सिंग होम तो लेबर ठेकेदार के तौर पर काम किया। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उसने यहां आने के बाद अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा। पड़ोसियों के मुताबिक उसका खर्च अपनी आमदनी से कई गुना था। इस कारण उसने तमाम लोगों से कर्जा लिया हुआ था। उस पर कर्ज चुकता करने के लिए दबाव बढ़ने लगा था। गांव में ही उसने कई लोगों से करीब 60-70 हजार रुपये उधार ले रखे थे।
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rudrapratap
मकान मालिक सुमन ने बताया कि एक पखवाड़ा पहले एक दंपति उधार दी हुई रकम वापस मांगने आया तो उनका अंशुमान से झगड़ा भी हुआ था। इस दौरान दंपति ने उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी। उसने किसी और से रकम उधार लेकर उनका बकाया चुकाया था। शनिवार सुबह अंशुमान के घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था और रसोई गैस सिलेंडर भी खत्म था। अंशुमान रुपये का इंतजाम करने की बात कहकर सुबह करीब नौ बजे घर से निकला। करीब 11:30 बजे वह घर लौटा तो उसने पत्नी सरिता (37), बेटियों दिव्यांशी (15), हिमांशी (13) और आर्या (10) को जबरन जहर खिला दिया। बेटे रुद्रप्रताप सिंह (14) को जहर देने का प्रयास किया, लेकिन वह छूटकर भाग निकला। छोटी बेटी आर्या ने भी जहर थूक दिया।
रुद्रप्रताप से जानकारी होने पर जब मकान मालकिन का बेटा अतुल यादव और अन्य लोग भागकर उनके कमरे में पहुंचे तो बेड पर अंशुमान और उसकी बेटी दिव्यांशी की लाश पड़ी थी, जबकि सरिता एवं हिमांशी की हालत खराब थी। उन्होंने एंबुलेंस 108 सेवा के माध्यम से दोनों को राजकीय अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें गंभीर हालत देखते हुए निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। समाचार लिखे जाने तक उनके परिवार से कोई अस्पताल नहीं पहुंचा था। इधर कुंडा एसओ सुधीर कुमार ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों को लाने वाले ग्रामीणों से जानकारी जुटाई।