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1936 में पहली बार ब्रिटिश और अमेरिकी पर्वतारोहियों ने छुआ था नंदादेवी शिखर, कई हो चुके लापता

Mon, 03 Jun 2019 08:28 AM IST
अलका त्यागी भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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नंदा देवी शिखर - फोटो : अमर उजाला
भारत की दूसरी और विश्व की 23वीं सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी और नंदा देवी ईस्ट की चढ़ाई बेहद कठिन मानी जाती है। इसी कारण अब तक कुछ गिने चुने पर्वतारोही ही इस चोटी तक पहुंच सके हैं। नंदा देवी को 1936 में पहली बार ब्रिटिश और अमेरिकी पर्वतारोहियों ने छुआ था, जबकि नंदा देवी ईस्ट की चोटी पर 1939 में पहली बार पोलैंड के पर्वतारोही पहुंचे थे। वहीं हाल ही में शिखर फतह करने निकले आठ पर्वतरोही लापता हैं। जबकि चार पर्वरोही रेस्क्यू किए जा चुके हैं। 
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हाल ही में नंदा देवी ईस्ट फतह करने निकले विदेशी - फोटो : अमर उजाला
नंदा देवी चोटी की ऊंचाई 7434 मीटर है। यह चोटी भले ही विश्व में 23वें स्थान पर आती हो, लेकिन इस चोटी तक पहुंचने में कम ही लोगों को सफलता मिली है। कहा जाता है कि इस चोटी तक पहुंचने के लिए मार्ग पर काफी तिरछे पहाड़ हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण चढ़ाई में आगे बढ़ पाना काफी कठिन होता है। वर्ष 1936 में ब्रिटिश-अमेरिकी अभियान दल को पहली बार इस चोटी को फतह करने में सफलता मिली थी। 
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रेस्क्यू हुए चार विदेशी पर्वतारोही - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
नॉयल आडेल और विल तिलमेन शिखर को छूने वाले पहले पर्वतारोही थे, जबकि नंदादेवी ईस्ट पर 1939 में पोलेंड के पर्वतारोहियों को पहली बार सफलता मिली थी। नंदा देवी पर दूसरा अभियान 1964 में हुआ। इस अभियान में भारतीय पर्वतारोही एन कुमार के नेतृत्व में भारतीय टीम ने चोटी पर तिरंगा फहराया था। 

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रेस्क्यू हुए चार विदेशी पर्वतारोही - फोटो : अमर उजाला
नंदा देवी के दोनों शिखर फतह करने का मौका वर्ष 1976 में भारत और जापान के संयुक्त अभियान में शामिल पर्वतारोहियों को मिला। 1980 में भारतीय सेना का अभियान असफल रहा। 1981 में पहली बार तीन महिलाओं चंद्रप्रभा ऐतवाल, रेखा शर्मा और हर्षवंती बिष्ट ने इस चोटी को जीता था। दो वर्ष पूर्व नंदा ईस्ट चोटी के लिए निकला एक पर्वतारोहियों का दल लापता हो गया था। आठ सदस्यीय इस दल का कोई पता नहीं चल सका। 
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रेस्क्यू हुए चार विदेशी पर्वतारोही - फोटो : अमर उजाला
दो वर्ष पूर्व 2017 में पर्वतारोहण अभियान के लिए सेना का सात सदस्यीय दल नंदा ईस्ट चोटी को फतह करने के लिए निकला था। अभियान के दौरान इस दल के सभी सदस्य लापता हो गए थे। कई दिनों तक खोजने के बाद भी इस दल का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसी तरह से वर्ष 2007 में पंचाचूली की चोटी को फतह करने के लिए निकला सेना के पर्वतारोहियों का दल लापता हो गया था। बेहद कठिन मानी जाने वाली पंचाचूली की पांच चोटियों को फतह करने में अभी तक किसी भी पर्वतारोही को सफलता नहीं मिली है। 
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