हम आपको बता रहे हैं उत्तराखंड के ऐसे स्थान के बारे में, जहां एक साथ 7 पीढ़ियों के पितर तृप्त हो जाते हैं।
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पितृपक्ष
- फोटो : SOCIAL MEDIA
उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम में ब्रह्मकपाल नामक स्थान पर पित्रों को मोक्ष मिलता है। हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष में पितरों यानि हमारे मृत पूर्वजों का तर्पण करवाना परंपरा है।
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- फोटो : अमर उजाला
पितृ पक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है तथा कर्ता को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।
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मान्यता है कि बिहार में गया जी में पिंड दान करने से पितरों को शांति प्राप्त होती है। किंतु बद्रीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पितरों को मोक्ष मिलता है और पितरों का उद्धार होता है।
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उत्तराखंड चमोली जनपद में स्थित बद्रीनाथ धाम में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है ब्रह्मकपाल तीर्थ। इस तीर्थ में पिंडदान और तर्पण के द्वारा सात पीढियों के पितर तृप्त हो जाते है।
बदरीनाथ मंदिर के वेदपाठी राधाकृष्ण थपलियाल बताते हैं कि यहाँ पर पिंड प्रदान करने के बाद मनुष्य को कभी पिंड दान नहीं करना पड़ता। इसलिए इस तीर्थ को ब्रह्मकपाल के नाम से जाना जाता है। यहां पर पिंडदान करने के लिए देश के कोने-कोने से लोग आते हैं और अपने पितरों को मोक्ष प्रदान करने हेतु पिंडदान करते है।