थाइलैंड से हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए एक विदेशी श्रद्घालु ने बताया कि जिस फूल के बारे में उन्होंने इंटरनेट पर पढ़ा था। आज उसने दीदार होकर वे बहुत खुश हैं।
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Brahmakamal
दरअसल, जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों राज्य पुष्प ब्रह्मकमल अपनी खुशबू बिखर रहा है। हेमकुंड साहिब और फूलों की
घाटी के आसपास ब्रह्म कमल के खिलने से क्षेत्र की खूबसूरती और भी बढ़ गई है। यहां खिले ब्रह्मकमल तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में तेरह हजार फीट की ऊंचाई के क्षेत्रों में खिलने वाले ब्रह्मकमल का आयुर्वेद के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों में भी विशेष महत्व है।
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ब्रह्मकमल और इसकी जड़ से दवाइयां बनाई जाती हैं। यह पुष्प गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय पुत्री मां नंदा का प्रिय भी माना जाता है। इसके संरक्षण के लिए वन अधिनियम में विशेष प्राविधान किए गए हैं।
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ब्रह्मकमल का वानस्पतिक नाम सीसुरिया ओब्लीटा है। हिमालय क्षेत्र में ब्रह्मकमल जुलाई से सितंबर तक खिलता है।
थाइलैंड से हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए वेनीवान केसूफान का कहना है कि ब्रह्मकमल के बारे में उन्होंने इंटरनेट और किताबों में पढ़ा था। इस बार हेमकुंड साहिब में फूल के दीदार किए। ब्रह्मकमल बेहद खूबसूरत फूल है।