आठ बार के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर का सोमवार तड़के निधन हो गया। अपने इंदिरा नगर, सीमा द्वार स्थित घर पर उन्होंने आखिरी सांस ली। सुबह उन्हें नींद से जगाने का प्रयास किया गया तो उनके प्राण त्यागने का पता चला। उनके पार्थिव शरीर को बलबीर रोड स्थित भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं के दर्शन के लिए रखा गया। बाद में लक्खीबाग श्मशान में पुलिस सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शोक जताया है।
उनकी बहू पूर्णिमा कपूर ने बताया कि रात को वह दो शादी समारोह में शामिल होने के बाद घर लौटे थे। उसके बाद वह अपने कमरे में आकर सो गए। उनकी पत्नी सविता कपूर भी उसी कमरे में सोई थीं। अक्सर सुबह उठने वाले कपूर जब काफी देर तक नहीं उठे तो परिवारजनों ने उनको देखा। उनका शरीर ठंडा पड़ चुका था।
परिजनों ने तुरंत पारिवारिक डॉक्टर को फोन कर घर बुलाया। जांच के बाद डॉक्टर ने सुबह करीब साढ़े छह बजे उनके निधन की पुष्टि की। उनके बेटे अमित कपूर ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से वह कह रहे थे कि उनकी छाती में भारीपन है। छह साल पहले मेदांता में उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
निधन की सूचना मिलते ही आसपास के लोग और भाजपा कार्यकर्ताओं के उनके आवास पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत समेत कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर उनके परिजनों को सांत्वना दी।
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बाद में काफी देर तक उनके पार्थिव शरीर भाजपा मुख्यालय में रखा गया, जहां कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया।
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विधायक हरबंस कपूर अपने लैंब्रेटा स्कूटर से ही आवाजाही किया करते थे। यह स्कूटर उनकी पहचान बन चुका था। आसपास के ज्यादातर लोग इस स्कूटर को अच्छी तरह जानते हैं।
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कई बार कार्यक्रमों और जनता के बीच भी वह इसी पर सवार होकर पहुंच जाते थे। लोग ताज्जुब करते कि कैसे विधायक होने के बावजूद वो स्कूटर पर चल रहे हैं।
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हरबंस कपूर की गिनती प्रदेश के सबसे ज्यादा सक्रिय विधायकों में होती थी। वह रोजाना सुबह घूमने निकलते थे और उस दौरान हर आने-जाने वाले से संवाद बनाए रखते।
हर कार्यकर्ता के घर जाकर उससे मिलना, सुख-दुख में काम आना और सरकार-शासन के काम करना, उनका अलग ढंग का काम करने का स्टाइल था। वो विधानसभा क्षेत्र के हर बड़े-छोटे कार्यकर्ता को नाम से जानते थे।