prakash pant
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प्रदीप, बसंत ही नहीं पिथौरागढ़ में ऐसे सैकड़ों लोग और परिवार हैं, जिनको प्रकाश पंत ने व्यक्तिगत रूप से मदद दी। लोगों के सुख-दुख के साथी प्रकाश पंत के अचानक ही अपने बीच से चले जाने से लोग बेहद दुखी और आहत हैं। पंत से लोगों का लगाव अंतिम यात्रा में भी झलका। हजारों लोग जार-जार रो रहे थे। कह रहे थे कि ऐसा नेता मिलना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।