बहन यमुना के प्रेम, समर्पण और स्नेह से प्रसन्न होकर यमदेव ने बहन का कुछ भी वरदान मांगने को कहा। तब यमुना ने भाई यमराज से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर भोजन करने आएं और इस दिन जो बहन अपने भाई को पूजा के बाद टीका लगाकर भोजन कराए उसे आपका भय न रहे। मान्यता है कि जो भाई इस दिन श्रद्धा से बहन के आतिथ्य को स्वीकार करता है उसे और उसकी बहन को यमदेव का भय भी नहीं रहता।