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इस बार बसंत पंचमी पर भूलकर भी करें ये काम, जीवनभर के लिए होगा अशुभ

Mon, 22 Jan 2018 06:36 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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saraswati
22 जनवरी को बंसत पंचमी के दिन इस बार अगर ऐसा किया तो यह आपके जीवन के लिए अशुभ होगा। 

 
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सरस्‍वती देवी
माघ शुक्ल पंचमी तिथि (वसंत पंचमी) के नाम से जाना जाता है। इस दिन वाणी की अधिष्ठात्री सरस्वती देवी की पूजा की जाती है। इस दिन से बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी करते हैं, लेकिन इस बार शुक्र अस्त की वजह से ऐसा करना शास्त्र सम्मत नहीं है। ज्योतिषों के अनुसार शुक्र अस्त में विद्यारंभ संस्कार, शादी-ब्याह, मुंडन आदि कार्य निषेध माने जाते हैं। ऐसे में अगर ऐसे काम किए तो वे अशुभ होंगे।

 
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astrology - फोटो : google
ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखा है कि भगवान कृष्ण के कंठ से उत्पन्न देवी का नाम सरस्वती हुआ। उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार एक ओर जहां 22 जनवरी यानी वसंत पंचमी को 18 वर्षों बाद विशेष संयोग बन रहा है वहीं शुक्र अस्त की वजह से विद्यारंभ संस्कार शास्त्र सम्मत नहीं माना जा रहा है। 

 

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बसंत पंचमी - फोटो : अमर उजाला
आचार्य ने बताया कि 21 जनवरी को दिन में 3:32 बजे पर पंचमी तिथि लगेगी। 22 जनवरी को शाम 4:25 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। मकर राशि पर सूर्य-शुक्र, केतु का मिलन वर्ष 2000 के बाद अब होगा। 18 वर्ष बाद बन रहे इस संयोग को विशेष माना जा रहा है। वहीं 15 दिसंबर से एक फरवरी तक शुक्र अस्त होने से शुभ मुहूर्तों का अभाव अभी बना रहेगा। शुक्र अस्त होने की वजह से विद्यारंभ संस्कार करना सही नहीं माना जा रहा है। विद्यारंभ संस्कार में इस दिन बच्चों को कॉपी पेन आदि देकर पढ़ाई की शुरुआत कराई जाती है। इसे शुभ माना जाता है।
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astrology - फोटो : google
सुबह 7:15 से 8:34 बजे तक अमृत की चौघड़िया में पूजन करना शुभ होगा। इसके बाद प्रात: 9:52 से 11.10 बजे तक शुभ की चौघड़िया एवं मध्याह्न 12:10 से 12:52 बजे तक अभिजीत मुहूर्त मेें शुभ प्रद हैं। प्रात: 8:34 से 9:52 तक राहुकाल रहेगा। इसके बाद दिन में 1:48 से 2:56 बजे तक चर की चौघड़िया मुहूर्त में सरस्वती पूजन, जात कर्म, नाम करण, पुंसवन, सीमंतोन्नयन, अन्नप्राशन आदि संस्कार कर सकते हैं। शुक्र अस्त का दोष इन संस्कारों को करने पर नहीं होता।
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vishnu ji
डॉ.आचार्य सुशांत राज के अनुसार इस दिन गेहूं एवं जौ की बालियां घर के मुख्य द्वार पर लगाने की हमारी परंपरा है। सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करने के बाद रति और कामदेव की पूजा करें। वसंत पंचमी को भगवान विष्णु सरस्वती एवं श्री कृष्ण राधा की पूजा पीले पुष्पों, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से करें।
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halwa
इसके साथ ही पीले और मीठे चावलों या हलवे का भोग लगाकर स्वयं सेवन करने की परंपरा है। इस दिन बालक-बालिकाओं को शुभ मुहूर्त में विद्यारंभ संरस्कार कराया जाता है। लेकिन इस वर्ष 22 जनवरी को शुक्र अस्त दोष होने से विद्यारंभ संस्कार नहीं किया जा सकता है। 5 फरवरी के बाद विवाह आदि मुहूर्त प्रारंभ होंगे। 
 
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