उम्र सिर्फ दस साल, लेकिन कर दिखासा ऐसा कि दुनिया भर में छा गया। जिसने भी इस बच्चे के बारे में सुना उसे पहले तो यकीन ही नहीं हुआ कि यह सच है। लेकिन यह बिल्कुल सच है...
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पिथौरागढ़ नगर से सटे हुड़ेती गांव के मूल निवासी और दिल्ली के बीजीएस इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा छह में पढ़ रहे दस वर्षीय हार्दिक उप्रेती ने अंग्रेजी में उपन्यास ‘ए क्रिसमस मिरेकल’ लिखकर साहित्य जगत में नाम दर्ज कर लिया है।
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इसी साल मार्च में उसका यह उपन्यास बाजार में आ चुका है। इतनी कम उम्र में गंभीर चिंतन वाले उपन्यास को लिखने वाले हार्दिक के साक्षात्कार का दिल्ली आकाशवाणी के रेनबो कार्यक्रम के जरिये 25 जून को सीधा प्रसारण होगा। हार्दिक के अंदर लिखने की प्रतिभा बचपन से ही है।
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आठ साल की उम्र में ही उसने लघुकथा और कहानियां लिखनी शुरू कर दीं। हार्दिक की रचनात्मकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने यू-ट्यूब पर एचएनएजी गेमिंग चैनल भी लांच कर दिया है। कहानी और उपन्यास लिखने के शौक के साथ-साथ वह फुटबाल खेलना पसंद करता है।
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उसे इतिहास विषय में गहरी रुचि रहती है। अपने पिता लोकेश उप्रेती के साथ इन दिनों हुड़ेती गांव पहुंचे हार्दिक ने बताया कि जल्द ही उसका एक नया उपन्यास प्रकाशित होगा। हार्दिक के पिता लोकेश दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं और मां रश्मि उप्रेती गृहणी हैं।
हार्दिक के लिखे गए उपन्यास ‘ए क्रिसमस मिरेकल’ को दिल्ली के ब्लू रोज पब्लिशर ने बाजार में उतारा है। नन्हे हार्दिक की इस उपलब्धि पर कवि जनार्दन उप्रेती, लेखक राजेश मोहन उप्रेती, डा. हेम पांडे, संजय पांडे, डा. हरीश जोशी, हुड़ेती के ग्राम प्रधान मनोज उप्रेती, खेल प्रशिक्षक उषा उप्रेती, मनोज जोशी, पुष्कर रावत, कै. दीवान सिंह बिष्ट ने खुशी जताई है।