रिजर्व बैंक की वजह से हजारों बैंक ग्राहक परेशानी से घिर गए हैं। इसके पीछे की वजह जानेंगे तो नोटबंदी में झेली फजीहत याद आ जाएगी।
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उत्तराखंड के कुमाऊं में कैश की किल्लत के चलते लाइन में लग रहे लोगों को नोटबंदी के दौरान झेली गई जिल्लत याद आ रही है। बागेश्वर-चंपावत, हल्द्वानी, रुद्रपुर शहरों समेत अधिकतर जगह रविवार को एटीएम कैशलेस रहीं। लगातार दो दिन के अवकाश ने दिक्कत बढ़ा दी।
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पर्वतीय जनपदों में तो पिछले करीब पखवाड़े भर से नकदी का संकट बना हुआ है। बताया जा रहा है कि रिजर्व बैंक से पर्याप्त करेंसी न आने के कारण एटीएम संचालन में दिक्कत आ रही है। ऊपर से जमा निकासी में अंतर के कारण समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है।
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एटीएम
- फोटो : concept photo
ऊधम सिंह नगर में रविवार को 363 एटीएम कैशलेस हो गईं। खटीमा जैसे सीमांत क्षेत्रों में शनिवार से एटीएम मशीनों में पैसा नहीं है। सभी बैंकों के करेंसी चेस्ट बंद होने के कारण थर्ड पार्टी एजेंसियों ने भी मशीनों में कैश नहीं डाला। शनिवार शाम तक रुद्रपुर के कुछ एटीएम मशीनों में पैसा था लेकिन रविवार सुबह लगभग सभी एटीएम कैशलेस हो गईं। सुबह से ही लोग एटीएम मशीनों के बाहर परेशान नजर आए। चंपावत में भी रविवार को अधिकतर एटीएम बंद रहीं।
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दो हजार का नोट
- फोटो : self
एसबीआई के मुख्य एटीएम से जरूर रकम निकली, लेकिन यहां भी सिर्फ दो हजार रुपये के नोट ही उपलब्ध थे। हल्द्वानी में नवाबी रोड पर एचडीएफसी और बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम समेत कलावती चौराहे, देवलचौड़ (एसबीआई का एटीएम) के एटीएम खाली थी। पीएनबी के भी कुछ एटीएम खाली पड़ी थीं। बागेश्वर में भी नकदी का संकट रहा।
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sbi
जमा निकासी में अंतर होने से भी गहरा रहा नकदी संकट
चंपावत में भारतीय स्टेट बैंक के पास सवा करोड़ रुपये ही बचे हैं। बैंक में प्रतिदिन ग्राहकों की ओर से करीब 25 लाख रुपये जमा हो रहे हैं जबकि हर दिन 60 लाख रुपये निकासी हो रही है। जमा निकासी में बड़ा अंतर और रिजर्व बैंक से करेंसी ने आने के कारण बैंकों की दिक्कत में इजाफा हो रहा है। नकदी संकट को देखते हुए एसबीआई अन्य बैंकों को पांच लाख रुपये से अधिक नहीं दे रहा है। एसबीआई के उप प्रबंधक निर्मल भट्ट के अनुसार बैंक में वर्तमान में सवा करोड़ के अलावा 80 लाख रुपये के सिक्के उपलब्ध हैं लेकिन ग्राहक इन सिक्कों को लेना पसंद नहीं कर रहे हैं।
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पिथौरागढ़ को चार दिन पहले 72 करोड़ का ‘मरहम’
पिथौरागढ़ जिले में नकदी संकट के बीच बृहस्पतिवार को 72 करोड़ के मरहम से बैंकों को फौरी राहत मिली लेकिन स्थायी समाधान होने के आसार कम हैं। संकट को देखते हुए एसबीआई ने रकम निकालने के लिए घोषित की गई लिमिट अब हटा ली है। इससे पहले नकदी संकट का हाल ये था कि कतार में लगे-लगे लोगों की हालत बिगड़ने लगी थी।
अवकाश के दिन एटीएम में पैसा डालने से संबंधित आरबीआई से कोई गाइड लाइन नहीं मिली है। महीने के दूसरे शनिवार और लगातार अवकाशों के चलते सभी बैंकों के करेंसी चेस्ट भी बंद रहते हैं। इस कारण ऐजेंसियां भी एटीएम मशीनों में पैसा नहीं डाल पाती हैं। - मधुसूदन, लीड बैंक अधिकारी, ऊधमसिंह नगर
चंपावत में धीरे धीरे नकदी का संकट गहरा रहा है। जिले को नकदी उपलब्ध कराने के लिए रिजर्व बैंक देहरादून को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन करेंसी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। - आनंद सिंह रावत, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत