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ये है सबसे बड़े 'खलनायक', फिर भी फैंस के दिलों पर करते हैं राज

Mon, 12 Jun 2017 10:36 AM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
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baldev rana - फोटो : facebook
खलनायक किसी को पसंद नहीं, लेकिन फिर भी ये सबसे बड़ा खलनायक अपने फैंस के दिलों पर राज करता है। जानिए, इस खलनायक की कहानी....
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baldev rana - फोटो : facebook
भले ही गढ़वाली सिनेमा को अभी भी अपनी पहचान बनाने के लिए वर्षों लग गए, लेकिन गढवाली फिल्मों के इस अभिनेता ने अपनी अदाकारी से गढवाल ही नहीं देशभर में अपनी छाप छोड़ी। ये उत्तराखंड में गढ़वाली फिल्मों के सबसे बड़े खलनायक माने जाते हैं। जानिए, इनके बारे में कुछ मजेदार बातें....
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1987 से अपनी गढ़वाली फिल्म करियर की शुरूआत करने वाले रुद्रप्रयाग जनपद के कपणियां गांव के बलदेव राणा आज लोगों के दिलों में सबसे बड़े खलनायक के रुप में जाने जाते हैं। हालांकि रील लाइफ में उनकी खलनायकी और रियल लाइफ उनका सरल स्वभाव, यही इनकी पहचान है।

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10 सुपरहिट फिल्म दे चुके बलदेव राणा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत ही खलनायक से की थी। फिल्म डायरेक्टर चरण सिंह चौहान ने इन्हे फिल्म में पहला ब्रेक दिया था। 
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बस वह दिन था और आज का दिन है, इनकी अदाकारी ने सभी को अपना कायल बना दिया। बलदेव राणा अभी तक 61 से ज्यादा स्टेज कार्यक्रम भी कर चुके हैं।
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51 साल के बलदेव राणा की सुपरहिट स्‍थानीय फिल्मों में कौथिक, बेटी ब्वारी, बटंवारा, रैबार, बटोई, चक्रचाल, मेरी गंगा होली त मैमू औली और सुबेरो घांम, भुली हे भुली प्रमुख हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में बलदेव राणा कहते हैं कि सरकार का कोई सहयोग नहीं मिलने से आज उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री अपनी पहचान नहीं बना पा रहा है। बलदेव जल्द ही अपनी एक ‌नई फिल्म के साथ अपने फैंस के सामने आएंगे। वे बेहतर स्क्रिप्ट पर कार्य कर रहे हैं, जो उत्तराखंड शासन प्रशासन और यू‌थ पर फोकस है।

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वे आगे कहते हैं कि परिषद द्वारा फिल्म विकास परिषद बोर्ड बनाया गया। लेकिन, वह कर क्या रहा है, इसकी किसी को कोई खबर नहीं। जरूरत है कि ‌सरकार और बोर्ड परिषद के सदस्य व्यवसाय के बारे में न सोचकर अपना अस्तित्व खो रहे उत्तराखंड गढवाली फिल्म बचाएं। जिससे यहां के युवाओं को भी मौका मिले और वे पलायन को मजबूर न हों। 
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बलदेव राणा इस वक्त मुंबई में नंदा राजजात और माधो सिंह भंडारी जैसे नाटकों पर जोर दे रहे हैं। वे मुंबई में लाखों उत्तराखं‌डियों को अपने साथ जोड़कर प्रदेश की संस्कृति को देश-विदेश पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं। बलदेव राणा ने बताया कि जब भी वे खलनायक की भूमिका करते हैं, तो उनकी पत्नी उन पर थोड़ा नाराज होती थी। लेकिन फिर इसे वे ‌रील लाइफ समझकर चुप हो जाती थी। हालांकि बच्चों को उनकी खलनायक की अदाकारी भी बहुत पसंद है। वे जानते हैं कि उनके पिता एक अच्छे अभिनेता के साथ-साथ बेहतर इंसान भी हैं। 
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