उत्तराखंड के श्रीनगर में होने वाला प्रसिद्ध वैकुण्ठ चतुर्दशी मेला आज शनिवार को शुरू हो गया। इस मेले में निसंतान दंपति संतान खड़े दीये की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस पूजा को करने से घर में संतान होती है।
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Kamleshwar Temple
- फोटो : AmarUjala
बैकुंठ चतुर्दशी पर्व के अवसर पर कमलेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाले खड़ा दीया अनुष्ठान में 160 निसंतान दंपति पूजा में शामिल हुए। पूजा के लिए 264 दंपतियों ने पंजीकरण कराया था।
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Baikunth Chaturdashi
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मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने शाम गोधूलि के समय पांच बजकर चालीस मिनट पर दीपक प्रज्वलित कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया। महंत ने बताया कि सोमवार सुबह दंपति महंत को साक्षी मानकर दीपकों जलाएंगे। इसके बाद में महंत दंपतियों का व्रत तुड़वाकर प्रसाद वितरित करेंगे।
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महंत आशुतोष पुरी बताते हैं कि कमलेश्वर मंदिर में भगवान विष्णु ने देवासुर संग्राम के दौरान कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के दिन अस्त्र-शस्त्रों के लिए भगवान शंकर की तपस्या की थी।
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तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने दूसरे दिन सुबह विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इस पूजा को पूजा एक निसंतान दंपति भी देख रहे थे। निसंतान दंपति ने भगवार शंकर से संतान का वरदान मांगा।
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माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दिया कि जो भी कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के अवसर पर पूरी रात खड़ा दिया अनुष्ठान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी।