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इस मंदिर में दीये जलाने से भरती है निसंतान दंपतियों की गोद

Sun, 13 Nov 2016 02:07 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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baikunth chaturdashi - फोटो : AmarUjala
उत्तराखंड के श्रीनगर में होने वाला प्रसिद्ध वैकुण्ठ चतुर्दशी मेला आज शनिवार को शुरू हो गया। इस मेले में निसंतान दंपति संतान खड़े दीये की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस पूजा को करने से घर में संतान होती है।
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Kamleshwar Temple - फोटो : AmarUjala
बैकुंठ चतुर्दशी पर्व के अवसर पर कमलेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाले खड़ा दीया अनुष्ठान में 160 निसंतान दंपति पूजा में शामिल हुए। पूजा के लिए 264 दंपतियों ने पंजीकरण कराया था।
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Baikunth Chaturdashi - फोटो : AmarUjala
मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने शाम गोधूलि के समय पांच बजकर चालीस मिनट पर दीपक प्रज्वलित कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया। महंत ने बताया कि सोमवार सुबह दंपति महंत को साक्षी मानकर दीपकों जलाएंगे। इसके बाद में महंत दंपतियों का व्रत तुड़वाकर प्रसाद वितरित करेंगे।

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Baikunth Chaturdashi - फोटो : AmarUjala
महंत आशुतोष पुरी बताते हैं कि कमलेश्वर मंदिर में भगवान विष्णु ने देवासुर संग्राम के दौरान कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के दिन अस्त्र-शस्त्रों के लिए भगवान शंकर की तपस्या की थी।
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Baikunth Chaturdashi - फोटो : AmarUjala
तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने दूसरे दिन सुबह विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इस पूजा को पूजा एक निसंतान दंपति भी देख रहे थे। निसंतान दंपति ने भगवार शंकर से संतान का वरदान मांगा।
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Baikunth Chaturdashi - फोटो : AmarUjala
माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दिया कि जो भी कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के अवसर पर पूरी रात खड़ा दिया अनुष्ठान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी।
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kamleshwar temple - फोटो : file photo
तब से आज तक यहां पर प्रत्येक बैकुंठ चतुर्दशी को भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में दंपति इस पूजा में शामिल होते हैं।
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