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बंद हो जाएंगे विश्व प्रसिद्ध इस धाम के रास्ते, नृसिंह देवता की भवष्यिवाणी हैरतअंगेज करने वाली

Sat, 14 Apr 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
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बदरीनाथ धाम - फोटो : AmarUjala
 विश्व विख्यात इस प्रसिद्ध धाम के रास्ते बंद हो जाएंगे। नृसिंह देवता की भविष्यवाणी सभी को हैरतअंगेज करने वाली है।
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बदरीनाथ धाम - फोटो : AmarUjala
जोशीमठ स्थित मंदिर में मौजूद नृसिंह भगवान की मूर्ति की दाहिनी भुजा के कारण बदरीनाथ धाम लुप्त हो जाएगा।
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lord narsingh
उत्तराखंड के इस मंदिर में मौजूद भगवान नृसिंह भगवान की मूर्ति में हर साल 'हैरतअंगेज' बदलाव हो रहा है।

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lord narsingh
नृसिंह मंदिर के माहात्म्य को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता है कि भगवान नृसिंह की बायीं भुजा की कलाई धीरे-धीरे पतली होती जा रही है।


 
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badrinath - फोटो : file photo
 जिस दिन यह कलाई भुजा से टूटकर अलग हो जाएगी, उसी दिन विष्णुप्रयाग में स्थित जय और विजय पर्वत आपस में मिल जाएंगे और बदरीनाथ धाम का रास्ता बंद हो जाएगा। तब भगवान बदरीनाथ के दर्शन जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में स्थित भविष्य बदरी मंदिर में होंगे।
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बद्रीनाथ
प्राचीन मान्यता यह भी है कि जब आठवीं वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य शंकराचार्य ने लोगों को श्रृष्टि की रचना से लेकर देव उत्पत्ति के बारे में बताया। इस दौरान शंकराचार्य ने जोशीमठ में विष्णु के अवतार नृसिंह भगवान की प्रतिमा स्थापित की।
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बद्रीनाथ - फोटो : amar ujala
इस प्रतिमा की दाहिनी भुजा पतली है। जो धीरे-धीरे और अधिक पतली होती जा रही है। केदारखंड के सनत कुमार संहिता में कहा गया है कि जब भगवान नृसिंह की मूर्ति से उनका हाथ टूट कर गिर जाएगा तो विष्णुप्रयाग के समीप पटमिला नामक स्थान पर स्थित जय व विजय नाम के पहाड़ आपस में मिल जाएंगे और बदरीनाथ के दर्शन नहीं हो पाएंगे।

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बद्रीनाथ
तब जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में स्थित भविष्य बदरी मंदिर में भगवान बदरीनाथ के दर्शन होंगे। केदारखंड के सनतकुमार संहिता में भी इसका उल्लेख मिलता है। बताते हैं कि आठवीं सदी में आदि गुरू शंकराचार्य ने ही भविष्य बदरी मंदिर की स्थापना की थी।

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badrinath
भविष्य बदरी मंदिर के समीप ही एक पत्थर पर शंकराचार्य ने भविष्णवाणी भी लिखी है। जिस भाषा में भविष्यवाणी लिखी गई है, उसे आज तक कोई नहीं पड़ पाया है।
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badrinath temple - फोटो : file photo
जोशीमठ में स्थित भगवान नृसिंह 18 अप्रैल को अपने नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हो जाएंगे। नृसिंह भगवान के लिए लुधियाना के एक व्यवसायी ने करीब 15 किलो चांदी का सिंहासन बनवाया है। व्यवसायी की ओर से सिंहासन को गुप्त दान के रुप में दिया जा रहा है।
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