भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट बुधवार अपराह्न बंद हुए तो हजारों भक्तों के साथ सीएम हरीश रावत भी धाम में मौजूद रहे। भगवान बदरीनाथ की डोली के सामने बैंड बजता देख सीएम खुद को रोक न सके।
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Badrinath Dham
- फोटो : AmarUjala
भगवान बदरीनाथ के कपाट बुधवार अपराह्न 3.45 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस मौके पर मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ ही करीब तीन हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। इस वर्ष कपाट बंद होने तक छह लाख 20 हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए।
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धाम में बुधवार तड़के से ही बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा शुरू हो गई थी। वेद ऋचाओं का वाचन बंद होने से वेदपाठियों ने गुप्त मंत्रों से भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया। धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चली।
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इस दौरान मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहे। बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार के दोनों ओर बदरीनाथ के वेदपाठी और संस्कृत के छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।
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बदरीनाथ की धार्मिक परंपरा के अनुसार अपराह्न तीन बजे बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा। माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीनाथ को ओढ़ाया गया।
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बदरीनाथ गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा गया। इसके बाद आदि गुरू शंकराचार्य की डोली और तीनों देवों की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुई।
बृहस्पतिवार को सभी डोलियां शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर योग ध्यान बदरी मंदिर में पहुंच जाएगी, साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर के लिए रवाना होगी। इस दौरान धाम में पहुंचे हजारों तीर्थयात्रियों व स्थानीय श्रद्धालुओं के जयकारों से संपूर्ण बदरीशपुरी गुंजायमान हो उठी।