धाम से आत्मीय लगाव
65 साल के साधु गोविंददास पिछले 20 साल से लगातार बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं। वे कहते हैं कि इस धाम से आत्मीय लगाव है। वहीं बदरीनाथ धाम में मध्यप्रदेश, यूपी, हिमाचल प्रदेश, गुजरात आदि प्रदेशों से साधु पहुंचते हैं। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है धाम में सभी आस्था लेकर पहुंचते हैं। कई धनाढ्य वर्ग के संतों के धाम में धर्मशाला और आलीशान कुटिया हैं।
- बदरीनाथ धाम में साधु-संत एक सीजन में दान में मिले सिक्के और रुपयों से लाखों की कमाई कर लेते हैं। वे बीच-बीच में अपनी रकम को किसी जिम्मेदार व्यक्ति के पास जमा करने के लिए देते हैं और धाम के कपाट बंद होने पर पैसे लेकर चले जाते हैं। वे भंडारों में भी पहुंचते हैं। यहां भी उन्हें श्रद्धालु दक्षिणा देते हैं। - प्रवीन ध्यानी, अध्यक्ष, पंडा पंचायत, बदरीनाथ धाम।
शीतकाल में बदरीनाथ धाम में कई साधु करते हैं तपस्या
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में बर्फबारी के बीच छह महीने तक कई साधु गुफा और अपनी कुटिया में तपस्या करते हैं। इसके लिए उनके शिष्य छह माह का राशन एकत्रित कर देते हैं। यह साधु जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद ही तपस्या करने के लिए रुक सकते हैं। इससे पहले उनका स्वास्थ्य परीक्षण व पुलिस की ओर से सत्यापन किया जाता है।
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