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उठ गया बदरीनाथ धाम के नाम के रहस्य से पर्दा, क्यों पड़ा यह नाम? जानें

Sun, 28 Aug 2016 09:20 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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बदरीनाथ धाम के दर्शन करने के बाद मंदिर के सिंह द्वार पर बदरीनाथ के जयकारे लगाते पाकिस्तान के तीर्थयात्री। - फोटो : amar ujala
अब तक सब यही समझते थे कि उत्तराखंड में स्थित बदरीनाथ धाम का नाम भगवान विष्‍णु के नाम पर रखा गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। एक देवी के त्याग के कारण बदरीनाथ धाम का नाम रखा गया है।
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helicopter landing in badrinath dangerous for politician
एक पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे।
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भगवान बदरीनाथ के दर्शन के बाद अमित शाह - फोटो : अमरउजाला
उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं।

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बदरीनाथ धाम में उमड़े श्रद्धालु - फोटो : AmarUjala
माता लक्ष्मीजी भगवान विष्णु को धूप, वर्षा और हिम से बचाने की कठोर तपस्या में जुट गयीं। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं।
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बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने के दौरान मंदिर परिसर में चौंफुला नृत्य करती पांडुकेश्वर की महिलाएं। - फोटो : Amar Ujala
तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा कि तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा।
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badrinath dham door open - फोटो : amar ujala
जहां भगवान बदरीनाथ ने तप किया था, वही पवित्र-स्थल आज तप्त-कुण्ड के नाम से विश्व-विख्यात है और उनके तप के रूप में आज भी उस कुण्ड में हर मौसम में गर्म पानी उपलब्ध रहता है।
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badrinath temple - फोटो : file photo
बदरी नारायण मंदिर जिसे बदरीनाथ भी कहते हैं अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। नर नारायण की गोद में बसा बदरीनाथ नीलकण्ड पर्वत का पार्श्व भाग है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा चारों धाम में से एक के रूप में स्थापित किया गया था। यह मंदिर तीन भागों में विभाजित है, गर्भगृह, दर्शनमण्डप और सभामण्डप।

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प्रसाद ऑनलाइन बिक्री - फोटो : file photo
मंदिर परिसर में 15 मूर्तियां है, इनमें सब से प्रमुख है भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची काले पत्थर की प्रतिमा है। यहां भगवान विष्णु ध्यान मग्न मुद्रा में सुशोभित है। जिसके दाहिने ओर कुबेर लक्ष्मी और नारायण की मूर्तियां है। इसे धरती का वैकुंठ भी कहा जाता है।

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बद्रीनाथ में बर्फबारी - फोटो : amar ujala
शंकराचार्य की व्यवस्था के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से होता है। मंदिर अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवम्बर तक मंदिर दर्शनों के लिए खुला रहता है।
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बद्रीनाथ केदारनाथ प्रसाद ऑनलाइन बिक्री
बद्रीनाथ धाम में श्री बदरीनारायण भगवान के पांच स्वरूपों की पूजा अर्चना होती है। विष्णु के इन पांच रूपों को ‘पंच बद्री’ के नाम से जाना जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार बद्रियों के मंदिर भी यहां स्थापित है। श्री विशाल बद्री पंच बद्रियों में से मुख्य है। इसकी देव स्तुति का पुराणों में विशेष वर्णन किया जाता है।
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